वायरल, चिकनगुनिया और डेंगू का प्रकोप कम नहीं हो रहा। प्रतिदिन इनसे पीड़ित मरीजों की मौत हो रही है। स्वास्थ्य विभाग भी इसे रोकने में नाकाम रहा है। विभाग मौसम बदलने का इंतजार कर रहा है। जिलेभर में अगस्त के पहले सप्ताह से अब तक करीब सवा सौ लोगों की मौत बुखार से हो चुकी है। आए दिन हो रही मौतों से दहशत का माहौल है।
लाला लाजपत मेमोरियल मेडिकल कॉलेज में मेडिसन विभाग की सीनियर चिकित्सक डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि मौसम में बदलाव के साथ नए तरीके का वायरस सक्रिय होता है। इस बार वायरस ज्यादा सक्रिय है, इसकी गिरफ्त में आने पर तेज बुखार, सिरदर्द और शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो रही है। इन सब के बीच एडिस मच्छर भी कुछ इलाकों में पल रहा है।
इसके काटने से डेंगू और चिकनगुनिया के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे मरीज के इलाज में खासी सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि ऐसे मरीजों को पैरासिटामोल और कुछ अन्य चुनिंदा दवायें ही दी जा सकती हैं। उनका कहना है कि मौत के केस में देखने को मिला है कि लोग लंबे समय तक स्वयं ही किसी स्टोर से दवायें खाते रहे हैं और जब तक चिकित्सक पर पहुंचे वायरल शरीर के कई आर्गन को नुकसान पहुंचा चुका होता है। ऐसे में वायरल होने पर चिकित्सक की सलाह से उपचार लें।
बचाव के उपाय
- वायरल से संक्रमित मरीज से थोड़ी दूरी बनाकर रखें।
- सार्वजनिक जगहों पर जाने से परहेज करें।
- ठंड पानी और अन्य शीतल पेय पदार्थों का सेवन न करें।
- भरपेट भोजन का सेवन करने से बचें।
- भोजन में तरल पदार्थों का अत्यधिक इस्तेमाल।
- थकावट होने पर भरपूर आराम करें।
- बुखार होने पर चिकित्सक की सलाह से दवा लें।
मेरठ में सवा सौ से अधिक मौतें
जिले में डेंगू और चिकनगुनिया के केस अगस्त के पहले सप्ताह से आने शुरू हो गए थे। उसके कुछ ही हफ्ते बाद से वायरल, डेंगू और चिकनगुनिया के बीच जान गवाने वाले मरीजों के मामले सामने आने लगे हैं। अभी तक जिलेभर में करीब सवा से अधिक लोगों की जान वायरल से हो चुकी है।
क्या हैं इंतजाम ?
सारी स्थिति से निपटने के लिए अभी तक जिला स्वास्थ्य विभाग इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के साथ मिलकर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा कैंप आयोजित कर रहा है। करीब तीन हफ्ते तक लगातार चिकित्सा कैंप आयोजित किए गए, लेकिन पोलियो अभियान के चलते अभियान को रोकना पड़ा। उधर, मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में वायरल बुखार के मरीजों की संख्या खासी ज्यादा है। जिला अस्पताल में बाल रोग विभाग से लेकर जनरल वार्ड में बेड़ों पर दो-दो मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। उधर, निजी अस्पतालों में भी खाली बेड उपलब्ध होने में खासी मुश्किल हो रही है।