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20 कैरेट सोने को हॉलमार्क में शामिल कराने को मेरठ के सराफ बढ़ाएंगे कदम

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वित्त मंत्रालय में शिकायत करने जाएंगे मेरठ के सराफ
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मेरठ। सोना मंडी की लाइफलाइन कही जाने वाली 20 कैरेट सोने की ज्वेलरी पर संकट आ गया है। सरकार की ओर से 20 कैरेट सोने को जून, 2021 तक हॉलमार्क से बाहर करने के आदेश से जिले के सराफ चिंतित हैं। मेरठ और आसपास के जिलों में 20 कैरेट सोने के गहने बहुतायत में बनते हैं। हॉलमार्क से बाहर होने पर मेरठ की सोना मंडी को भारी नुकसान होगा।
सराफा कारोबारी अपने कारोबार और इस ज्वेलरी को बचाने के लिए अब आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। मेरठ बुलियन ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री विजय आनंद अग्रवाल ने बताया कि वित्त मंत्रालय में जाकर स्वयं अपनी शिकायत दर्ज कराएंगे। ताकि 20 कैरेट सोना हॉलमार्क में शामिल रहे। यूनाइटेड ज्वैलर्स फेडरेशन के अध्यक्ष डॉ. संजीव अग्रवाल ने बताया कि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को शिकायत भेज चुके हैं।
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न तो नरम और न कठोर है 20 कैरेट
20 कैरेट सोना 14 और 18 ग्रेड के समान कठोर नहीं है न ही 22 कैरेट के रूप में बहुत नरम। 20 कैरेट सोने के मिश्र धातु का उपयोग कर विकसित कर इसमें गोल्ड की 833 (84 फीसदी) शुद्धता होती है। 20 कैरेट के आभूषण उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और उत्तराखंड में भी बनते हैं। सरकार ने 2000 से गोल्ड ज्वेलरी में बीआईएस हॉलमार्किंग स्कीम लागू है। वर्तमान में करीब 40 फीसदी गोल्ड ज्वेलरी की हॉलमार्किंग होती है।
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कैरेट के अनुसार तय होते हैं भाव
शुद्ध सोना 24 कैरेट का होता है। इसमें 99.99 फीसद सोना होता है। नरमी के कारण इससे केवल सिक्के बनते हैं। इसकी कीमत सबसे अधिक होती है। 22 कैरेट में आभूषण बनाया जाता है। इसमें 22 फीसद सोना होता है। हालांकि 22 कैरेट की ज्वेलरी में डायमंड या नग नहीं लग पाता है। मेरठ में 18 कैरेट में जो ज्वेलरी बनाई जा रही है। उसमें 75 फीसद सोना और 25 फीसद चांदी या तांबा मिलाया जाता हैं। 18 कैरेट सोने से डिजायनर जेवरात बनते हैं।
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