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झपकी लगते ही मची चीख पुकार, चौतरफा खून फैला, एक दर्जन लोग घायल  

Fri, 02 Jun 2017 02:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मारुति इको के ड्राइवर रामबीर को झपकी लगी और तेज रफ्तार कार हाईवे पर बीचोबीच खड़ी स्कॉर्पियो में जा घुसी। दोनों गाड़ियों में बैठे लोगों में चीख पुकार मच गई। चौतरफा खून ही खून पड़ा था। एक पल में भयावह हादसा हो गया और पुलिस समझ तक नहीं पाई। 
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मंजर ऐसा था कि सिपाही रोहित मलिक का शव देखकर पुलिसवालों के हाथ-पैर जवाब दे गए। उनकी हिम्मत नहीं पड़ी कि स्कॉर्पियो और मारुति इको में फंसे लोगों को निकाल ले। सूचना पर कंकरखेड़ा थाने से पुलिस पहुंची तो घायलों को निकाला गया। पुलिस के मुताबिक 14 साल की अनुष्का ने बताया कि उसके पापा सुधीर रस्तोगी ड्राइवर अंकल के पास वाली सीट पर बैठे थे। मम्मी व भाई सन्नी के साथ वह पीछे की सीट पर बैठी थी। पापा और ड्राइवर अंकल बात कर रहे थे। कुछ देर पहले दोनों चुप हो गए। अंदाजा लगाया गया कि गाड़ी चलाते ड्राइवर की पल भर के लिए झपकी लग गई। तभी वह पीछे से स्कॉर्पियो में घुस गई। 

दंपति और ड्राइवर ने सीट पर दम तोड़ा 
इको में सवार दंपति और ड्राइवर ने सीट पर दम तोड़ा। स्कॉर्पियो में सवार सभी छात्र घायल हो गए। हादसा होते ही सबकी आंखें बंद हो गई। अस्पताल में घायल छात्रों ने बताया कि आंख खुली तो दंपति और ड्राइवर का शव और चौतरफा खून पड़ा था। डर लगा कि  कहीं अपनी गाड़ी में किसी के साथ अनहोनी तो नहीं हुई। सारे दोस्त एक दूसरे को देख रहे थे। गाड़ी से निकलने का प्रयास किया, लेकिन खिड़की नहीं खुली।
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इकलौता बेटा था रोहित 
पुलिस ने बताया कि सिपाही रोहित मलिक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। रोहित की दो बहनें हैं, जिसमें बड़ी बहन प्रीति की शादी एक महीने पहले ही हुई है। छोटी बहन अंशिका पढ़ रही है। रोहित ने करीब दो साल एसएसबी (सीमा सुरक्षा बल) में नौकरी की थी। यह नौकरी छोड़कर 2015 में वह पुलिस में भर्ती हुआ था। बुधवार दिन भर रोहित ने वीआईपी ड्यूटी की थी। वह रात में ड्यूटी नहीं करना चाहता था, लेकिन मुंशी ने एसएसपी के निर्देश बताकर जबरन उसकी ड्यूटी पर भेजा था।

एक सहारा था, वो खत्म हो गया 
रोहित की मौत की जानकारी लगते ही परिजनों में कोहराम मच गया। रोहित के पिता मांगेराम और उनके गांव के सैकड़ों लोग सुबह ही पोस्टमार्टम हाउस मेरठ पहुंचे। इकलौते बेटे का शव देखकर पिता रुंधे गले से बोले कि एक ही सहारा था, भगवान ने वह भी छीन लिया। इसकी मां को अब क्या जवाब दूंगा। वह पढ़ने में बहुत होशियार था। परिजनों और ग्रामीणों का रो रोकर बुरा हाल था। सलामी के बाद पुलिस लाइन से उसका शव परिजन गांव लेकर चले गए। 

अपनी चोट भूला चाचा
इस हादसे में घायल सिपाही ओमपाल रोहित मलिक के चाचा हैं। चाचा भतीजे कंकरखेड़ा थाने में ही तैनात थे। रोहित का शव देखकर ओमपाल अपनी चोट भूल गए। उन्होंने रात में रोहित के पिता को फोन पर सूचना दी। जानकारी लगते ही रोहित की मां विमलेश बेहोश हो गईं। दोनों बहनें भाई की मौत के बारे में सुनते ही बिलख पड़ीं।

गए थे मन्नत मांगने, चली गई जान 
दंपति की मौत की जानकारी लगते उनके परिजन बृहस्पतिवार सुबह मेरठ पहुंचे। व्यापारी सुधीर के छोटे भाई राजेश रस्तोगी ने बताया कि उसके भाई कपड़ों की कढ़ाई का काम करते थे। सुधीर का इकलौता बेटा सन्नी मंदबुद्धि है। सन्नी के ठीक होने की मन्नत मांगने परिवार रात 1:30 बजे दिल्ली से चला था। ड्राइवर भी उनके पड़ोसी थे। उनको हरिद्वार में एक मंदिर में प्रार्थना करने जाना था। परिवार बहुत खुश था, बस सन्नी को लेकर थोड़ी चिंता थी। उनको उम्मीद थी कि एक दिन सन्नी ठीक हो जाएगा।

अनुष्का का रो रोकर बुरा हाल 
माता पिता की मौत हो चुकी है। भाई सन्नी अस्पताल में मौत से लड़ रहा है। अनुष्का अस्पताल से दोपहर घर चली गई थी। उसका रो रोकर बुरा हाल है। उधर, ड्राइवर रामबीर राठौर के घर पर भी कोहराम मचा है। उसका बेटा पोस्टमार्टम हाउस पर अपने पिता का शव लेने आया। 

पोस्टमार्टम स्थल पर हंगामा 
व्यापारी की पत्नी मीनू जेवरात पहने हुई थी। पोस्टमार्टम के दौरान डॉक्टरों ने उसके जेवरात उतारकर पुलिस को दे दिए। पुलिस से पीड़ित परिवार ने जेवरात मांगे तो वह लिखापढ़ी में देने की बात कहने लगी। जिस पर पीड़ित परिवार ने विरोध जताया। पीड़ित परिवार की एक रिश्तेदार न्यायिक अधिकारी हैं, जो पोस्टमार्टम हाउस पहुंची थीं। उन्होंने सिपाही के अभद्रता करने पर उसे डांट भी लगाई।
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