सरधना से कैराना तक निकाले जाने वाली संगीत सोम की निर्भय यात्रा में कुछ समर्थक पूरी तैयारी से पहुंचे थे। विधायक संगीत सोम के समर्थकों ने उनके कैंप कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। इस दौरान एक समर्थक ने जहां फरसा तो दूसरे ने धारदार हंसिया लहराया। इस पर विधायक संगीत सोम की पर्सनल सिक्योरिटी में लगे लोगों ने उनसे यह धारदार हथियार लेकर अपने पास जमा कर लिए।
निर्भय यात्रा ने दिला दी खेड़ा पंचायत की याद
निर्भय यात्रा में उमड़ी संगीत समर्थकों की भीड़ ने खेड़ा महापंचायत की याद ताजा करा दी। जिस तरह उस महापंचायत को रोकने लिए पुलिस-प्रशासन ने तमाम जतन किये थे। लेकिन भीड़ को रोकने में कामयाब नहीं हो पाये थे। उसी तरह शुक्रवार को भी तमाम नाकेबंदी के बीच सोम समर्थक सरधना पहुंचने में सफल रहे।
लगभग ढाई साल पहले खेड़ा महापंचायत को रोकने के लिए पुलिस-प्रशासन ने मास्टर प्लान तैयार किया था। खेड़ा ही नहीं उसके आसपास के गांवों तक आने वाले रास्ते भी जगह-जगह सील किये गये थे। मुख्य मार्ग तो दूर खेतों के रास्तों पर भी पुलिस का पहरा था।
लेकिन उस पंचायत में लोग खेतों और रजवाहों को पार करते हुए पहुंचने में सफल रहे थे। शुक्रवार को भी हर रास्ते पर पहरा था और पुलिस आगे नहीं जाने दे रही थी। लेकिन समर्थकों ने पुलिस से उलझने के बजाय अपने वाहन चेकपोस्ट पर खड़े किये और पैदल ही सरधना पहुंच गये। सलावा, खेड़ा आदि तमाम गांवों से लोग ऐसे रहे, जो दो से आठ किमी का सफर पैदल कर सरधना पहुंचे।
सरधना के आधे हिस्से में लागू थी 144
मेरठ। इसे सत्ता का दबाव ही कहा जाएगा कि एसडीएम सरधना द्वारा लगायी गयी धारा 144 का असर आधे हिस्से में ही नजर आ रहा था। निर्भय यात्रा पर धारा 144 और सद्भावना यात्रा पर कुछ नहीं। क्योंकि सपा के झंडे लगी गाड़ियों को हर चेकपोस्ट पर आराम से रास्ता दिया जा रहा था।
जहां सभा हो रही थी, वहां पर पुलिस का कोई बड़ा पहरा नहीं था। ऐसा लग रहा था मानों सरधना में धारा 144 है ही नहीं। लेकिन दूसरी तरफ विधायक संगीत सोम समर्थकों को चेकपोस्टों पर धारा 144 का हवाला दिया जा रहा था। और उनके वाहन कस्बे से कई किमी दूर रोके जा रहे थे। धारा 144 के बावजूद बड़ी साउंड लगाकर सपाइयों ने सभा की। लेकिन उस पर प्रशासन ने कोई संज्ञान नहीं लिया। पुलिस- प्रशासन की इस कार्रवाई को लेकर आम जनता के बीच चर्चा रही।