- हम ख्याल फाउंडेशन की ओर से कवि सम्मेलन का आयोजन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। हम ख्याल फाउंडेशन की ओर से स्वतंत्रता दिवस पर हाजी आदिल चौधरी मार्केट में हाजी आदिल चौधरी की अध्यक्षता और एडवोकेट इरशाद चौहान के संयोजन में कवि सम्मेलन हुआ। मुख्य अतिथि मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने सामाजिक समरता का संदेश दिया।
मेरठ बार एसोसिएशन के महामंत्री रविंदर सिंह राणा ने दीप जलाकर शुभारंभ किया। संचालन एडवोकेट इरशाद बेताब ने किया। कवयित्री रचना वानिया ने पढ़ा- जुल्म किसी का हम न सहेंगे, लेना होगा अब प्रतिकार, धूल चटाकर ही दम लेंगे, वीरों की है यह ललकार...। नितिश राजपूत ने कहा- करूं पूजा में मंदिर में या कह लो कि नमाजी हूं, कहो पंडित मुझे तुम या यूं कह लो कि में काजी हूं...।
पुष्पेंद्र बावरा ने पढ़ा- मैं भारतवर्ष का हरदम, अमिट सम्मान करता हूं, यहां की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूं...। इरशाद बेताब ने कहा कि अपने लोगों से कभी मुंह नहीं मोड़ा मैंने, बात कैसी भी हो रिश्ता नहीं तोड़ा मैंने...। नीलोफर नूर ने पढ़ा-कहीं से जख्मी, कहीं से आधे जले मिलेंगे, हमारी आंंखों के ख्वाब सहमे हुए मिलेंगे। डॉक्टर शुभि सक्सेना ने कहा कि रोज इकरार थोड़े होता है, इश्क सौ बार थोड़े होता है। जमशेद माहिर ने कहा- इस दर्जा भी अदब के न सस्ते रहें चराग, शक्ल ए नियाज में ही जो बंटते रहें चराग...।
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...चाकू मत दे मेरे हाथ में, कलम रहने दे
पॉपुलर मेरठी ने खूब गुदगुदाया। उन्होंने सुनाया-मैं हूं जिस हाल में, ऐ मेरे सनम रहने दे, चाकू मत दे मेरे हाथ में, कलम रहने दे, मैं तो शायर हूं मेरा दिल है बहुत ही नाजुक, मैं पटाखे से ही मर जाऊंगा, बम रहने दे। अध्यक्षता कर रहे कवि सत्यपाल सत्यम ने पढ़ा- कभी तुम भर्त्सना करते कभी तुम निंदा करते हो, तुम अपने फायदे को, मुर्दे को भी, जिंदा करते हो...। प्रोफेसर युनुस गाजी, डॉक्टर जकी तारिक आदि ने भी शायरी से श्रोताओं का दिल जीता। संयोजक इरशाद बेताब का खास योगदान रहा।