26 जुलाई की रात रोहटा थाने से भागा रोहटा गांव का मंजू उर्फ ऋषिपाल आखिरकार शुक्रवार को मवाना से पकड़ लिया गया। पुलिस पर उसे गायब करने के आरोप लगे थे। एसओ समेत तीन पुलिसकर्मियों पर अपहरण का केस तक दर्ज हो गया था। लेकिन खुलासा हुआ कि थाने से भागने के बाद षड्यंत्र के तहत वह राजस्थान के आश्रम में छिपा बैठा था। जहां गांव के एक युवक ने उसे पहचान लिया था। पुलिस अब कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही है।
बकौल एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन, पूछताछ में मंजू (45) ने बताया कि थाने से फरार होने के बाद वह हरिद्वार अपनी बेटी के यहां जाकर छिप गया था। सूचना पर उसके परिजन भी वहां पहुंच गए। वहीं पर सभी ने मिलकर यह षड्यंत्र रचा। परिजनों ने कहा कि वह गांव वापस ना आए। पुलिस को वह देख लेंगे। हरिद्वार में तीन दिन रुकने के बाद वह राजस्थान के बाबा मोहन राम के आश्रम में जाकर ठहरा। आश्रम में रोहटा का ही एक युवक भी ठहरा था।
उसे मंजू को लेकर चल रहे घटनाक्रम का पता था। उसने तुरंत रोहटा थाने फोन करके सूचना दे दी। पुलिस वहां पहुंचती, इससे पहले ही मंजू फरार हो गया। इसके बाद से पुलिस ने चौतरफा घेराबंदी कर ली। शुक्रवार को मंजू जब मवाना के बिराना गांव में अपनी बहन के घर जा रहा था तो उसे बिराना रोड से पकड़ लिया गया।
कहीं भी जा, पर गांव में मत आना
पत्रकार वार्ता में पुलिस ने कुछ देर के लिए मंजू को पेश किया तो उसने बताया कि पुलिस की पूछताछ के बाद वह काफी डर गया था। हरिद्वार रिश्तेदारी में पहुंचकर घर वालों को जानकारी दी। रोहटा से उसके परिजन पहुंचे तो उसे 200 रुपये देते हुए कहा कि कहीं भी चला जा, पर गांव में मत आना। इसके बाद वह राजस्थान चला गया था।
अब सबक सिखाएंगी पुलिस
एक बदमाश की सहायता के शक में पूछताछ के लिए लाया गया मंजू पुलिस के लिए ही मुसीबत बन गया था। मंजू की फरारी के बाद रोहटा पुलिस ने खूब फजीहत झेली। मंजू के परिजनों ने तो उसकी हत्या तक की आशंका जता दी थी। मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ा। भाजपा और रालोद नेता खुलकर पुलिस के विरोध में आ गए थे। दबाव में एसओ और तीन पुलिसकर्मी ही उसके अपहरण में नामजद हो गए थे। पुलिस सब जानती थी। लेकिन चुनौती मंजू को सकुशल बरामद कर सामने लाने की थी। क्योंकि मंजू के साथ कोई अनहोनी पुलिस पर भारी पड़नी थी। बरामदगी के बाद राहत की सांस लेने वाली पुलिस अब सबक सिखाने के मूड में है।