रोहटा थाने से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर आधी रात को भागे मंजू उर्फ ऋषिपाल की कहानी सुनकर पुलिस अफसर भी दंग रह गए। पहले तो मंजू पुलिस से बचने के लिए गायब रहा। लेकिन बाद में एसओ रोहटा समेत तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ अपहरण का मुकदमा दर्ज हुआ तो परिजनों की नीयत भी बदल गई। परिजन मंजू को गायब करके समझौते के नाम पर पुलिस से मोटी रकम वसूलना चाहते थे। जिसकी पूरी स्क्रिप्ट मंजू के भांजे पंकज ने रची थी।
एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन के मुताबिक 26 जुलाई की रात रोहटा निवासी मंजू उर्फ ऋषिपाल को एक मामले में पूछताछ के लिए रोहटा थाने लाया गया था। उस दौरान भांजा पंकज अन्य लोगोें के साथ थाने पहुंचा था। जिसके बाद परिजन रात में घर चले गये। आधी रात को मंजू थाने में मुंशी और पहरे पर तैनात संतरी को चकमा देकर थाने से भाग गया था। जंगल के रास्ते होता हुआ मंजू रोहटा बाईपास पर पहुंचा और अपने साथी से बिछड़ने की बात कहते हुए कांवड़ियों की गाड़ी में सवार होकर खतौली पहुंच गया था।
एक रात वह हरिद्वार के चंडी मंदिर में रुका तो वहां गांव के लोगों ने पहचान लिया। जिसके बाद रात में ही एक केसरिया अंगोछा लेकर बहादराबाद में अपनी रिश्तेदारी में जा पहुंचा। इस दौरान उसने अपने रिश्तेदार के फोन से अपने घर फोन किया तो पंकज ने कहा कि मामा, तुम अभी बात मत करो, हम वहीं आ जाएंगे।
पुलिस देगी हमें मोटा पैसा
30 जुलाई को पंकज मंजू के बेटे के साथ बहादराबाद पहुंचा। उसने मंजू को बताया कि नेताओं और जनता ने पूरा दबाव बना रखा है। एसओ और सिपाहियों पर तुम्हारे अपहरण का केस दर्ज करा दिया है। बस तुम अभी इसी तरह गायब रहना, हमारी मौज आ जाएगी। यह सुनते ही मंजू ने भांजे से पूछा कि कैसे? तो पंकज ने कहा कि मामा पंचायत का एलान हो गया है। हम तुम्हारी हत्या की बात कहेंगे तो पुलिस समझौते में मोटी रकम दे देगी। पुलिस से इतना पैसा मिलेगा कि तुम बाहर भी नहीं कमा सकते। जिसके बाद मंजू राजस्थान के एक आश्रम में चला गया।
कॉल डिटेल में फंसा पंकज
एसपी देहात ने बताया कि पंकज की नंबर पर एक माह में तीस से अधिक बार बात हुई है। मंजू के गायब होने के बाद पंकज ने फोन करने बंद कर दिये। जिस पर पुलिस पंकज पर नजर रखे हुई थी।