वालिया और वार्ष्णेय फैमिली को करण और निवेश से बहुत उम्मीदें थीं। दोनो होनहार थे। करण देहरादून में पढ़ाई के साथ मौसेरे भाई के साथ बिजनेस में सहयोग कर रहा था तो निवेश कोचिंग के साथ टीचिंग में बेहतर जॉब की तलाश में था।
अचानक ही धनोल्टी जाने का प्रोग्राम बना, जो जिंदगी का आखिरी सफर साबित हुआ। दोनों मसूरी-धनोल्टी मार्ग पर कार खाई में गिरने से मौत के मुंह में समा गए। उनके साथ दो परिवारों के सपने भी पल भर में दफन हो गए।
सी-89 सरस्वती लोक कॉलोनी निवासी दलजीत सिंह की कॉलोनी के बाहर ही सेनेटरी शॉप है। उनका बेटा करण वालिया (20) देहरादून के ग्राफिक एरा से बीटेक कर रहा था। करण के मौसेरे भाईयों का देहरादून में सेनेटरी का काम है। करण पढ़ाई के साथ उनके बिजनेस में भी सहयोग करता था। सरस्वती लोक कॉलोनी में ही बी-53 निवासी प्रोफेसर मनोज वार्ष्णेय परतापुर पॉलीटेक्निक कॉलेज में सिविल विभाग के हेड हैं।
उनका बेटा निवेश (23) मेरठ से बीटेक कर चुका था। करण से दोस्ती के चलते निवेश देहरादून में ही कोचिंग करने के साथ बेहतर जॉब की तलाश में था। परिजनों के अनुसार सोमवार रात ही करण और निवेश का करण के मौसेरे भाई देहरादून निवासी मयंक मक्कड़ के साथ अचानक धनोल्टी जाने का प्रोग्राम बन गया था।
नयी कार से निकले थे
परिजनों के अनुसार तीनों करण की नई आई-20 कार से देहरादून से धनोल्टी के लिए निकले थे। लेकिन मसूरी-धनोल्टी मार्ग पर कार सैकड़ों फुट खाई में गिरी। जिसमें करण और निवेश की मौत हो गई, जबकि मयंक पहाड़ी में अटकने की वजह से बच गया। हालांकि उसके चेहरे पर गंभीर चोटें आई हैं।
मिलनसार हैं परिवार
करण और निवेश के परिवार का सरस्वती कॉलोनी में काफी सम्मान है। दोनों परिवार मिलनसार हैं और सुख-दुख में साथ रहते हैं। मयंक के पिता हरभजन सिंह प्रॉपर्टी डीलर है जबकि व्यापारी नेता लल्लू मक्कड़ करण के चाचा है। करण और निवेश की मौत की सूचना जब परिवार के सदस्यों को मिली तो कोहराम मच गया। जबकि कॉलोनी में शोक छा गया।