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जनशताब्दी बन गई पैसेंजर, रेलवे मूकदर्शक

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जनशताब्दी बन गई पैसेंजर, रेलवे मूकदर्शक
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मेरठ। कांवड़ यात्रा के दौरान रेल यात्रियों का सफर मुसीबत भरा हो रहा है, लेकिन रेलवे प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। लगातार तीन दिनों से कांवड़ियों का प्रीमियम ट्रेनों पर कब्जा है। इसके बाद भी कोई हल नहीं निकाला जा रहा है। जिससे यात्री आरक्षित श्रेणी के डिब्बों में भी सुरक्षित नहीं है। रेलवे प्रशासन की ओर से पुलिसकर्मियों को यात्रियों की सुरक्षा में लगाया गया, लेकिन यह भी फेल हो गए। रोजाना शाम के समय हरिद्वार और देहरादून की तरफ जाने वाली जनशताब्दी और उत्कल एक्सप्रेस ट्रेनों में बिना किसी रोकटोक के कांवड़िये सफर कर रहे हैं।
बुधवार को भी नई दिल्ली से वाया मेरठ, देहरादून को जाने वाली जनशताब्दी का हाल बेहाल रहा। शाम पांच बजे के आसपास सिटी स्टेशन पहुंची जनशताब्दी को दोनों तरफ से कांवड़ियों ने घेर लिया गया। कांवड़ को ट्रेन के दोनों ओर बांधकर सफर किया। सिटी स्टेशन पर पुलिसकर्मी कांवड़ियों को समझा नहीं सके। जनशताब्दी की सभी कोच पर कांवड ही नजर आ रही थी। मानो ऐसा लग रहा था कि रेलवे ने जनशताब्दी को कांवड़ स्पेशल ट्रेन घोषित कर दिया हो।
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टू-डीएस समय की पटरी से उतरी
कांवड़ यात्रा को देखते हुए दिल्ली-सहारनपुर पैंसेजर को हरिद्वार तक बढ़ाया गया। रेलवे ने मात्र इसी ट्रेन को ही कांवड़ स्पेशल ट्रेन को रखा। लेकिन यह ट्रेन भी समय की पटरी से उतर गई है। सुबह 7.04 बजे सिटी स्टेशन आने वाली टू-डीएस पैसेंजर अपने तय समय से दो घंटे 51 मिनट की देरी से सिटी स्टेशन पहुंचती। इसके देरी से चलने पर सबसे ज्यादा नुकसान दैनिक यात्रियों को झेलना पड़ रहा है। सुबह के समय दैनिक यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए ट्रेनों की पहले से ही कमी है।
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