श्रीमद् भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण अष्टमी तिथि, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चंद्रमा में अर्धरात्रि को हुआ। श्रीकृष्ण के जन्म के समय सभी छह तत्व भाद्रपद मास, कृष्ण पक्ष, अर्द्धरात्रि अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र, बुधवार, वृष का चंद्रमा था। इस बार 6 सितंबर यानी आज जन्माष्टमी में इन सभी तत्वों का दुर्लभ संयोग मिल रहा है।
श्री इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि सभी शास्त्रकारों ने ऐसे दुर्लभ योग की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा एवं स्तुतिगान किया है। निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु के अनुसार भी आधी रात के समय रोहिणी में यदि अष्टमी तिथि के साथ ये सभी योग बन जाएं तो उसमें श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से तीन जन्मों के पाप दूर हो जाते हैं।
जयंती योग भी
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के योग से रहित हो तो केवला और रोहिणी युक्त हो तो जयंती कहलाती है। जयंती में भी यदि बुधवार का योग आ जाये तो वह अत्युत्कृष्ट फलदायक हो जाती है। इस बार जन्माष्टमी पर 30 साल बाद ग्रह नक्षत्रों का और छह तत्वों का विशिष्ट संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार ग्रह नक्षत्रों की यह स्थिति भगवान कृष्ण की भक्ति और जन्म के लिए शुभ है।
भक्तों को मनोवांछित फल प्रदान करने वाली है। ज्योतिष के अनुसार इस बार अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र के साथ सूर्य अपनी स्व राशि सिंह में और चंद्रमा भी अपनी वृष उच्च राशि में है। बुध, बृहस्पति अपनी मित्र राशि और शनिदेव अपनी स्वराशि में विराजमान हैं इस संयोग में पूजाअर्चना से मनोकामना पूरी होगी।
इस प्रकार करें घर में जन्म अभिषेक व पूजन
बुधवार को प्रातः घर पर ध्वजारोहण एवं संकल्प पूर्वक व्रत आरंभ करके दिन भर ओम नमो भगवते वासुदेवाय और ओम कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणत क्लेशनाशाय गोविन्दाय नमो नमः आदि मन्त्रों का जप, श्रीकृष्ण नाम स्तोत्र पाठ, कीर्तन आदि तथा रात्रि को श्रीकृष्ण बालरुप का पूजार्चन, ध्वजारोहण, झूला-झूलाना, चंद्रमा को अर्घ्य देना आदि शुभ कृत्य करने चाहिए।
रात्रि को बारह बजे भगवान श्रीकृष्ण के बालरुप लड्डू गोपाल जी के गर्भ से जन्म लेने के प्रतीकस्वरूप खीरा फोड़कर एवं शंख ध्वनि सहित श्री भगवान का पवित्र स्नान अभिषेक, श्रृंगार आदि कर घी के दीपक जलाकर आरती उतारकर माखन मिश्री का भोग, धनिया पंजीरी का भोग लगाकर प्रभु बालकृष्ण को झूले में अवरोहण कराना चाहिए।
भोग खिलौना अर्पित करने चाहिए। आगामी छह दिन तक प्रभु को नित्य नवीन वस्त्र ही पहनाएं तथा झूले में ही विराजमान रखें छवें दिन कढी चावल का भोग लगाकर छठी उत्सव मनाना चाहिए। जन्माष्टमी के दिन सुबह स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।
अष्टमी तिथि : बुधवार 6 सितंबर को दोपहर 03:38 से लेकर अगले दिन शाम 04:15 तक।
रोहिणी नक्षत्र: बुधवार 6 सितंबर को प्रातः 09:20 से लेकर अगले दिन प्रातः 10:25 तक।
चन्द्रमा: पूरे दिन रात वृष राशि में रहेंगे
राजकोट के सिंहासन पर कोलकाता की पोषाक में विराजेंगे कान्हा
जन्माष्टमी के अवसर पर बाजार लड्डू गोपाल के लिए खास खिलौने और पोषाकों से भरे पड़े हैं। इसमें राजकोट के स्टेनलेस स्टील के सिंहासन, कोलकाता की रेशमी जरी की पोषाक खास है। साथ ही डिजाइनर पोषाक भी खासी आकर्षक हैं। मंगलवार को सुबह से देर रात तक बाजारों में लड्डू गोपाल की पोषाक आदि की खरीदारी होती रही।