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शहीद प्रदीप के चचेरे भाई बोले- हताश होने की जरूरत नहीं, लेकर रहेंगे मां के लाल का बदला

Fri, 15 Feb 2019 01:27 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
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प्रदीप का फाइल फोटो और साइड में चचेरे भाई अमित - फोटो : अमर उजाला
जम्मू के पुलवाला आतंकी हमले में शहीद हुए प्रदीप के चचेरे भाई अमित का कहना है कि इस हमले से हताश होने की जरूरत नहीं है। एक मां का लाल शहीद हुआ है लेकिन, सैकड़ों खड़े हो गए हैं। उन्होंने कहा सेना को डरने की जरूरत नहीं है पूरा देश उनके साथ खड़ा हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने आतंकियों को मिटाने का जो संकल्प लिया है, उसे जारी रखना चाहिए। अमित ने कहा कि एक- एक कर आतंकियों को मार गिराना चाहिए।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि प्रदीप तयेरे भाई की शादी के बाद लौटा था। गुरुवार सुबह भी उसका फोन आया था और उसने बताया था कि वह चार घंटे बाद पहुंच जाएगा। लेकिन किसी को क्या पता था कि शाम को मां के लाल की शहादत की खबर आएगी।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
अमित ने बताया कि गुरुवार रात में परिवार के सभी सदस्य टीवी चैनल देख रहे थे, उसी दौरान पुलवामा हमले की खबर देखी तो चिंता हो गई। उन्होंने बताया कि उसी दौरान करीब 9:15 बजे सीआएपीएफ द्वारा फोन आया। उन्होंने बताया कि प्रदीप शहीद हो गया है। इसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया।

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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
पढ़िए पूरा अपडेट-
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ कैंप पर हुए आतंकी हमले में प्रदीप दो दिन पहले ही तयेरे भाई की शादी के बाद लौटा था। सुबह 11 बजे भी परिजनों से प्रदीप की फोन पर बात हुई थी, लेकिन शाम को ही उसकी शहादत की खबर आ गई। प्रदीप के पिता जगदीश का कहना है कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है, लेकिन वह चाहते हैं कि मोदी सरकार उसकी शहादत का ऐसा बदला ले।

परिजनों के अनुसार प्रदीप वर्ष 2003 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। वर्तमान में उसकी पोस्टिंग श्रीनगर में थी। उसकी पत्नी कामिनी और दो बेटे सिद्धार्थ और दुष्यंत गाजियाबाद में रहते हैं। बाकी परिजन गांव में। परिजनों ने बताया कि आठ फरवरी को ही वो अपने ताऊ के लड़के अमित की शादी में छुट्टी लेकर आया था। गाजियाबाद के गोविंदपुरम निवासी उसकी पत्नी और बच्चे भी आए थे। सब बड़े खुश थे। 12 फरवरी को ही वो वापस ड्यूटी पर गया था। चचेरे भाई उमेश कुमार के अनुसार  के अनुसार बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे ही प्रदीप का फोन उनके पास आया था।
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प्रदीप का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
उसने कहा था कि वो अपनी ड्यूटी पर पहुंच गया है। परिजन भी निश्चिंत हो गए थे, लेकिन शाम को वहां आतंकी हमले की खबर मीडिया पर चलने के बाद वे परेशान हो गए। प्रदीप का फोन मिलाया, लेकिन वो नहीं लगा। वे लोग प्रदीप के परिचितों से संपर्क में लगे थे। इस बीच रात करीब सवा नौ बजे उसकी बटालियन के किसी अधिकारी का फोन आया कि प्रदीप कुमार आतंकी हमले में शहीद हो गए हैं। ये सुनकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि ये भी हो सकता है।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
खबर आते ही प्रदीप के घर उमड़ा पूरा गांव 
प्रदीप की शहादत की खबर आते ही प्रदीप के घर ग्रामीणों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। ग्रामीण परिजनों को सांत्वना देने पहुंच रहे थे। प्रदीप की पत्नी और बच्चे गाजियाबाद में ही थे। उन्हें भी परिजनों ने देर रात तक खबर नहीं दी थी। रात करीब 11 बजे सैकड़ों ग्रामीण प्रदीप के घर पर जुटे थे। आदर्श मंडी थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और परिजनों से बात की।
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प्रदीप का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
बहुत मिलनसार था प्रदीप
बनत के ग्रामीणों ने बताया कि प्रदीप काफी मिलनसार था। उसका परिवार भले ही गाजियाबाद रहता हो, लेकिन जब भी वो छुट्टी आता था गांव में जरूर आता था। बच्चों के साथ यहां आता था। गांव में अपने दोस्तों और आसपड़ोस वालों से मिलता था। उन्हें कश्मीर और सेना के किस्से सुनाता था। वो काफी मिलनसार था। हसमुख स्वभाव और मिलनसार होने का ही नतीजा था कि उसकी शहादत की खबर आते ही उसके गांव के दोस्त और सैकड़ों ग्रामीण वहां जुट गए थे।

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विलाप करते परिजन
मेरा बेटा बहादुर था
प्रदीप के पिता जगदीश का कहना है कि उसे गर्व है कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। लेकिन वह चाहते हैं कि सरकार उसकी शाहदत का ऐसा बदला ले कि आतंकियों और पाकिस्तान की सात पुश्तें याद रखें। प्रदीप की शहादत की खबर मिलते ही परिवार में गमों का पहाड़ टूट गया था। परिवार में कोहराम था।  पिता जगदीश और मां सुरेंता की आंखों में आंसू थे। पिता जगदीश ने कहा कि उनका बेटा बहादुर था।
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विलाप करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
वो जब भी आता था तो बताया करता कि किस तरह हमारी सेना आतंकियों के छक्के छुड़ाती है। उन्हें बेटे के खोने का गम तो है, लेकिन तसल्ली इस बात है कि उनका बेटा देश के लिए शहीद हुआ है। बस वे सरकार से यही चाहते हैं कि उसके बेटे की शहादत का ऐसा बदला ले कि आतंकियों और उनके शरणदाता पाकिस्तान की सात नस्लें भी याद रखें, तभी इस हमले के शहीद जवानों की चिता ठंडी होगी। 

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