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जैन समाज घरों में रहकर मनाएगा भगवान महावीर जयंती

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मेरठ। शहर के विभिन्न जैन मंदिरों में मनाए जाने वाले भगवान महावीर जन्मोत्सव पर सोमवार को कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। कोरोना संक्रमण के खौफ के चलते लॉकडाउन में यह निर्णय किया गया है। इस बार जैन समाज के लोग घरों में ही पूजा-अर्चना करेंगे। घरों पर जैन ध्वज और राष्ट्रीय ध्वज लहराएंगे।
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अहिंसा के पुजारी भगवान महावीर की आज हर घर में पूजा-अर्चना की जाएगी। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि आचार्य शांति सागर छानी वाली परंपरा के पट्टाचार्य ज्ञानसागर जी का 33वां दीक्षा महोत्सव भी कल मनाया जाएगा। आचार्य ज्ञानसागर जी इसी युग के श्रेष्ठ आचार्यों में हैं। उनका जन्म मुरैना में 1957 में हुआ था। 19 वर्ष की युवावस्था में ही उन्होंने सब कुछ त्याग कर वैराग्य का रास्ता ग्रहण कर लिया। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि सोमवार सुबह 8:00 बजे जैन समाज के लोग अपने-अपने घरों में पूजा करेंगे। शाम 7:00 बजे सब उनकी आरती करेंगे। साथ ही आचार्य ज्ञानसागर जी के स्वास्थ्य की मंगल कामना की जाएगी।
चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर
भगवान महावीर स्वामी वर्तमान चौबीसी के अंतिम तीर्थंकर हुए। वर्तमान के शासन नायक हैं। भगवान का जन्म चैत्र शुक्ल त्रयोदशी के दिन 2600 वर्ष पूर्व कुंडलपुर में हुआ। उनकी आयु 72 वर्ष की थी जिसमें 30 वर्ष ग्रह अवस्था में रहकर वैराग्य धारण किया। घर का त्याग कर दिया। 12 वर्ष की तपस्या के बाद केवल ज्ञान प्राप्त किया और संपूर्ण विश्व के ज्ञाता हो गए। इस प्रकार 30 वर्ष तक जन कल्याण का उपदेश दिया। 72 की आयु में पावापुर स्थित पदम सरोवर से यह शरीर त्यागकर मोक्ष अवस्था को प्राप्त कर गए। उन्होंने अपनी सभी इंद्रियों पर काबू पा लिया था। इसी कारण उन्हें जिन भगवान कहा गया। प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि भगवान महावीर ने लोगों को अहिंसा का संदेश दिया। प्रेम भाव से रहने की कला बताई। उन्होंने बताया कि धन, दौलत के पीछे भागना अनुचित है। वस्तु का मोह छोड़कर आत्मा पर विश्वास करें। जो लोग उनके बताए मार्ग पर चलते हैं वे ही जैन कहलाते हैं।
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