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जेल गए खून से हिसाब चुकता करने वाले

Mon, 22 Aug 2016 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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दयाराम हत्यारोपी आदेश - फोटो : अमर उजाला
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 पिता की बेइज्जती का 17 साल बाद खून से हिसाब चुकता करने वाले हत्यारोपी और उसके साथी को मेडिकल थाना पुलिस ने रविवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया। यह सनसनीखेज मामला रिटायर्ड इंस्पेक्टर दयाराम प्रजापति की दिनदहाड़े हत्या से जुड़ा है।
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सीओ सिविल लाइन विनोद कुमार सिरोही ने घटना का खुलासा करते हुए बताया कि बीती चार अगस्त को मेडिकल थाना अंतर्गत जागृति विहार सेक्टर-9 निवासी रिटायर्ड इंस्पेक्टर दयाराम प्रजापति की मार्निंग वॉक के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। शनिवार रात एसओ मेडिकल रविन्द्र वशिष्ठ ने मुखबिर की सूचना पर सीसीएसयू के पास से दो युवकों आदेश उर्फ मोनू गुर्जर पुत्र सीताराम निवासी प्रेमकुटी आवास कालोनी कोतवाली नगर बिजनौर और विपिन शर्मा पुत्र कृष्ण शर्मा निवासी क्षत्रिय नगर बिजनौर को गिरफ्तार किया था। इनसे थाने लाकर पूछताछ की गई तो सामने आया कि दोनों युवकों ने रिटायर्ड इंस्पेक्टर की हत्या की थी। दोनों सोहराब गेट बस अड्डे से बरेली की बस पकड़कर फरार होने जा रहे थे। इनके पास से एक तमंचा, तीन कारतूस और घटना में प्रयुक्त मारुति कार बरामद की गई। रविवार को दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया।

17 की उम्र में उठा ली थी कसम
सीओ ने बताया कि दयाराम की हत्या का मुख्य आरोपी आदेश उर्फ मोनू गुर्जर है। पूछताछ में आदेश ने बताया कि वर्ष 1999 में उसने बिजनौर के डिग्री कॉलेज में बीए में प्रवेश लिया था। जहां उसका एक  युवती से प्रेम प्रसंग हो गया था। उस समय दयाराम सिविल लाइन चौकी इंचार्ज थे। जिन्होंने मेरे पिता सीताराम को बेइज्जत किया था। मेरी उम्र उस समय 17 साल थी। मैंने पिता की बेइज्जती का बदला लेने के लिए कसम खा ली थी।
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पिता ने रोक लिया था
बकौल आदेश, मेरे पिता ने मुझे कसम दे दी थी कि यदि तूने कुछ भी गलत किया तो मैं सुसाइड कर लूंगा। पिता की कसम के आगे मैं मजबूर रहा। पिछले साल ही मेरे पिता सीताराम की मौत हो गई। जिसके बाद नवंबर 2015 से मैं इंस्पेक्टर दयाराम की हत्या के लिए रैकी करने लगा।

कानून की पढ़ाई कर कानून तोड़ा
वर्तमान में आदेश एमए, एलएलबी करने के बाद लॉ की प्रैक्टिस कर रहा था। जबकि दयाराम इंस्पेक्टर पद से रिटायर हो चुके थे। दयाराम की हत्या के लिए उसने अपने दोस्त विपिन को साथ लिया। आदेश बीस हजार रुपये का लालच देकर विपिन को कार में बैठाकर मेरठ लाया था।

पिस्टल मांगने वाला निकला एसओ का मुखबिर
केस को खोलने के लिए मेडिकल पुलिस को पसीने छूट गये। आदेश ने बिजनौर के एक युवक से पिस्टल मांगी थी। लेकिन उसने पिस्टल देने से इंकार कर दिया था। दयाराम की हत्या करने के बाद आदेश ने युवक से कहा कि उसने तमंचे से ही काम कर दिया। वही युवक पूर्व में एसओ मेडिकल का पुराना मुखबिर निकला।
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