- सीसीएसयू के अर्थशास्त्र विभाग और संगठन की ओर से कराया गया गोष्ठी का आयोजन
गन्ना विशेषज्ञों ने कहा, नया बदलाव हुआ तो बर्बाद हो जाएंगे किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के व्यवसायिक संस्थान के सभागार में शुक्रवार को जय किसान आंदोलन और विवि के अथशास्त्र विभाग की ओर से गन्ना नियंत्रण आदेश 2026 को लेकर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें किसान नेताओं, गन्ना विशेषज्ञों और किसानों ने एक सुर में आदेश का विरोध किया और आदेश की खामियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि इस आदेश को लागू करने से पहले किसानों से बात करे। उन्होंने इसे किसानों के हितों पर कुठाराघात बताया। यह नया बदलाव हुआ तो किसान बर्बाद हो जाएंगे।
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए जय किसान आंदोलन के संस्थापक व अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि गन्ना नियंत्रण आदेश सुधार के नाम पर किसानों के साथ धोखा है। यह कानून गन्ना किसानों को मिल मालिकों का बंधुआ मजदूर बनाने की साजिश है। वर्ष 1966 के आदेश में जो बदलाव होने चाहिएं, वे तो किए नहीं गए बल्कि किसानों को ठगने का का कार्य किया जा रहा है। जय किसान आंदोलन इस कानून के खिलाफ गांव-गांव जाकर अलख जगाएगा। उन्होंने कहा कि आदेश में भुगतान की समय सीमा का उल्लंघन किया गया है। ब्याज दरों में कटौती, चीनी रिकवरी के मानकों में बदलाव, निजी मिलों को एकाधिकार देने का कार्य किया गया है।
किसान नेता पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान पहले ही लागत और खाद बीज की मार झेल रहे हैं। नए नियमों की गन्ने की खेती में घाटा होगा। मनीष भारती ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर से उठी यह आवाज पूरे देश में जाएगी। वरिष्ठ किसान नेता प्रीतम सिंह ने कहा कि यह आदेश पूरी तरह नौकरशाही के नियंत्रण में है। तराई किसान संगठन के तेजेंद्र सिंह विर्क ने कहा कि हम मांग करते हैं कि सरकार इस मसौदे पर फिर से विचार करे और किसान संगठन के साथ बैठकर उनकी आपत्तियों का निस्तारण करे। इस दौरान मेरठ की तरह अन्य जिलों, प्रदेशों में भी ऐसे आयोजन का निर्णय लिया गया।
डॉ. हरबीर सिंह ने भी गन्ना उत्पादन, रिकवरी समेत आदि के बारे में अपने विचार व्यक्त किए और नए आदेश के नुकसान बताए। इस मौके पर अर्थशास्त्र विभाग के निदेशक प्रो. अतवीर, सपा नेता सम्राट मलिक, किसान नेता यशपाल मलिक आदि मौजूद रहे।