मेडिकल कॉलेज परिसर में खुले में हुए प्रसव के मामले में अब सच को दबाने की कोशिश हो रही हैं। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि गायनी विभाग यह कहने का दबाव डाल रहा है कि प्रसव खुले में नहीं बल्कि वार्ड के अंदर हुआ था। उधर, प्राचार्य ने सवाल उठने पर जांच कमेटी के सदस्यों में फेरबदल किया है।
लावड़ निवासी जिस महिला का खुले में प्रसव हुआ था, उसके रिश्तेदार कामिल का आरोप है कि गायनी वार्ड की स्टाफ नर्स और चिकित्सक उस पर दबाव डाल रहे हैं। कह रहे हैं कि जांच में कुछ नहीं होने वाला। ऐसे में अगर यह लिखकर दे दोगे कि प्रसव खुले में नहीं वार्ड में हुआ था तो महिला का आगे अच्छे से इलाज हो जाएगा। कामिल ने इसकी शिकायत सोमवार को डीएम से करने की बात कही है। वहीं, इस संबंध में प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता का कहना है कि यदि महिला के परिजनों पर किसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है, तो वो मुझसे आकर शिकायत कर सकते हैं। उनकी शिकायत पर अलग से जांच करा ली जाएगी।
वहीं, प्राचार्य ने प्रसव मामले की जांच कर रही कमेटी में बदलाव करते हुए डॉ. अभिलाषा गुप्ता की जगह डॉ. कृति दूबे को सदस्य शामिल किया है। पीआरओ डॉ. दिनेश राणा को भी कमेटी में रखा है। जबकि टीम में डॉ. विभु साहनी सीएमएस व मैटर्न पहले से हैं। इससे पहले कमेटी पर सवाल उठा था कि जिन लोगों ने पहले ही खुले में प्रसव होने से इंकार कर दिया था, तो उन्हें जांच कमेटी में शामिल किया गया है।