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धन जोड़ने में नहीं, त्याग में है उसकी सार्थकता : भाव भूषण

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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
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हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के भव्य स्वर्णमयी त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ महामंडल विधान के 37वें दिन शुक्रवार को 465 परिवारों ने श्रद्धापूर्वक विधान कर पुण्य अर्जित किया। मुख्य वेदी पर भगवान शांतिनाथ के मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया।
त्रिमूर्ति जिनालय में मंगलाचरण, दिग्वंदन, पात्र एवं जल शुद्धि की विधियों के साथ अभिषेक संपन्न कराया गया। शांतिधारा अन्वय, अन्मय, संजय, अंकित, निकांक्षा, किंशु, शलभ, रति और विकास जैन परिवार ने की। पूजन एवं विधान की मांगलिक क्रियाएं पंडित आशीष जैन शास्त्री और पंडित दिलीप जैन शास्त्री ने संपन्न कराईं।
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मुनि भाव भूषण महाराज ने कहा कि जीवन में त्याग की महिमा सर्वोपरि है। सच्चा धनपति वह है जो धन जोड़ने में नहीं बल्कि उसका सदुपयोग और दान करने में विश्वास रखता है। उन्होंने कहा कि समुद्र जल को संचित करता है, इसलिए उसका पानी खारा होता है, जबकि नदी निरंतर बहती है, इसलिए उसका जल मीठा और सबके लिए उपयोगी रहता है। धन की तीन गतियां दान, भोग और नाश हैं, इसलिए धन का उपयोग धर्म, राष्ट्र और समाजहित में करना चाहिए।
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संगीतमय महाआरती के बाद धार्मिक अंत्याक्षरी प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें विजेताओं को नरेंद्र सिंह जैन और कुसुम जैन ने पुरस्कार प्रदान किए।

इस मौके पर क्षेत्रीय अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश कुमार जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, विजय कुमार जैन, महाप्रबंधक मुकेश कुमार जैन, अतुल जैन, गुरमीत, अनुपम, कमल जैन, सुदर्शन जैन, शुभम जैन सहित अनेक श्रद्धालुओं का सहयोग रहा।

प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद

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