मेरठ। पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दक्षिण राज्य और जम्मू-कश्मीर की भीड़ को एक पैमाने पर नहीं माप सकते हैं। हर जगह की भीड़ की मनोदशा अलग-अलग होती है, जिसे पहचानना बहुत जरूरी है। भीड़ से निपटने के लिए अलग प्रशिक्षण की जरूरत होती है। कहां, किस समय और किस स्थान पर किस प्रकार की फोर्स की जरूरत है, इस पर पूरा काम करना पड़ता है। आरएएफ एक कॉल पर जहां भी पहुंची, वहां दंगा नहीं हुआ।
रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ) के आईजी अरुण कुमार सिंह ने मंगलवार को वार्ता में कहा कि चाहे बलवा हो या फिर दंगा। जातीय संघर्ष या सांप्रदायिक तनाव, आरएएफ जहां भी रही जनता में सुरक्षा का विश्वास दिलाया है। उन्होंने बताया कि 7 अक्तूबर 1992 को मेरठ, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, भोपाल, अलीगढ़, हैदराबाद, जमशेदपुर, कोयंबटूर और इलाहाबाद में आरएएफ की वाहिनी स्थापित की गई थी। वर्तमान में देशभर में आरएएफ की 15 वाहिनी हैं। मेरठ में आरएएफ की वाहिनी होने से वेस्ट यूपी की सुरक्षा को मजबूती मिली है। आरएएफ 24 घंटे कॉल पर अलर्ट रहती है। दंगा नियंत्रण प्रबंधन के लिए आरएएफ के पास पर्याप्त संसाधन हैं।
हर जगह अलग रणनीति
आईजी के अनुसार आरएएफ जहां भी निकलती है, पूरे संसाधनों और तैयारी के साथ निकलती है। वेस्ट यूपी में हल्का बल का प्रयोग करना पड़ता है। यहां भीड़ आरएएफ को देखकर तितर-बितर हो जाती है। जरूरत पड़ने पर ही आंसू गैस के गोले या वाटर कैनन का प्रयोग करना पड़ता है। लेकिन जम्मू कश्मीर की भीड़ का मिजाज अलग है। वहां भीड़ ज्यादा हिंसक रहती है। पथराव, आगजनी और फायरिंग, धमाके वहां आम बात होती है। वहां सीआरपीएफ अलर्ट रहकर काम करती है। दक्षिण राज्यों की स्थिति कुछ और है। देश के मुख्य शहरों में आरएएफ ने अपने आप को शांति व्यवस्था के लिए स्थापित किया है।
भीड़ से नहीं हटता जवान
आरएएफ 97 वी वाहिनी के कमांडेंट एरिक जोस ने कहा कि आरएएफ या सीआरपीएफ का जवान कभी भीड़ से नहीं हटता। यूपी के बुलंदशहर में भीड़ ने एक इंस्पेक्टर की हत्या कर दी। आगजनी और बलवे से निपटने के लिए आरएएफ के जवान को पूरी ट्रेनिंग दी जाती है। भीड़ कितनी ही हो, कितना भी संघर्ष हो, पूरी फोर्स साथ मिलकर काम करती है। देश की किसी भी राज्य की पुलिस हो या सुरक्षा बल, सभी के लिए दंगा नियंत्रण मैनेजमेंट की ट्रेनिंग जरूरी है।
जम्मू कश्मीर का वीडियो दिखाया
म्यांमार के अधिकारियों को ट्रेनिंग के पहले दिन जम्मू कश्मीर की भीड़ के वीडियो के माध्यम से प्रशिक्षण दिया गया। जिसके बाद प्रत्येक हथियार का प्रयोग करना बताया। इस दौरान मेरठ बवाल, हरियाणा में जाट आंदोलन, दक्षिण राज्यों में हुईं हिंसक घटनाओं के वीडियो भी दिखाए गए। बताया कि भीड़ कैसे हमला बोलती हे और उसे कैसे कंट्रोल किया जाता है।