उन्होंने कहा कि बस इतनी बात है कि अगर किसी औरत को तीन तलाक दे दी जाती है और वो किसी और मर्द से शादी कर लेती हैं फिर उसको वहां इत्तेफाकन तलाक मिल जाती है या फिर उस पति की मौत हो जाती है तो वो पहले शौहर से शादी कर सकती है। मौलाना वाजदी ने कहा कि जहां तक बहुविवाह का मसला है तो इसका हक मर्द को वर्ष 1937 में शरीयत एक्ट बना उसकी रूह से भी मुस्लिम मर्द अगर जरूरत हो और वो एक से ज्यादा बीवियों में इंसाफ कर सकता हो तो उसको बहुविवाह की इजाजत है।
उन्होंने कहा कि अगर हमारी अदालतें शरीयत मामलों में हस्तक्षेप कर रही हैं तो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलमा-ए-हिंद अपने वकील अदालतों में खड़े करेंगे जो इस्लाम के हवाले से अपना रुख रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जान बूझकर शरीयती मामलों में हस्तक्षेप कर मुस्लिमों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। ये मुल्क जो जम्हूरियत के नाम पर वजूद में आया है। इसमें सभी को अपने धर्म के मुताबिक जिंदगी जीने का अधिकार प्राप्त है।
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