भैसाली मैदान में चल रहे श्री अयुतचंडी महायज्ञ के पांचवें दिन बृहस्पतिवार को यज्ञशाला में नित्य देव्यार्चन पूर्ण यज्ञ आरंभ हुआ। यजमानों ने मां जगदंबा का पूजन किया।
पंडित चरणदत्त कात्यायन ने पूजन कराया। कथा मंडप में परम पूज्य डॉ. श्रीगुण प्रकाश चैतन्य ने भगवान श्रीराम का पूजन किया। उन्होंने बताया कि वेद, पुराण और उपनिषद् ही ब्रह्मा की सांस हैं। इन्हीं ग्रंथों में दिए गए ईश्वर की आज्ञा का पालन करके ही मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है। चींटी से लेकर ब्रह्मा तक सभी शास्त्र की आज्ञा मानकर परम पद प्राप्त करते हैं। सनातन के सभी सिद्धांतों को मानकर ही प्राणिमात्र का कल्याण हो सकता है। उन्हीं कार्यों की श्रंखला में प्राणी का कल्याण केवल यज्ञ द्वारा ही संभव है। ऐसा मानकर ही श्री अयुतचंडी महायज्ञ किया जा रहा है। शक्ति उपाय सनातनियों की सबसे श्रेष्ठ पूजा है। सांय काल के सत्र में परम पूज्य श्री त्रयंबकेश्वर चैतन्य महाराज द्वारा भगवान श्रीराम के जन्म का वर्णन किया गया। उन्होंने कहा कि श्रीराम ने अवतार लेकर लीला कार्य द्वारा मनुष्य मात्र प्राणियों के कल्याण की भावना से काम किया। उन्होंने अपनी जीवन शैली से लोगों को बताया कि हमें किस जीवन शैली से जीना चाहिए। शाम को भव्य आरती में हजारों लोगों ने धर्म का लाभ लिया। शाम को दिल्ली से कुछ कैंसर रोगी भी महायज्ञ में पहुंचे। इनके निरोगी होने के लिए मां दुर्गा से प्रार्थना की गई। महाराज का अभिनंदन हर्ष गोयल ने किया और मंच संचालन पंडित चरणदत्त काल्यायन ने किया। समिति अध्यक्ष ज्ञानेंद्र अग्रवाल एवं महामंत्री प्रवीन कुमार गुप्ता ने पंडाल की व्यवस्था संभालते हुए सभी अतिथियों का स्वागत किया। भोजन की व्यवस्था बिजेंद्र अग्रवाल, जय प्रकाश अग्रवाल आदि ने की।