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इरफान खान स्मृतिशेष: संघर्ष के हर कदम पर ‘मकबूल’ का साथी बना मेरठ, अभिनय के हर दौर में दिया साथ 

Thu, 30 Apr 2020 12:18 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

  • 'चंद्रकांता' सीरियल से मेरठ और इरफान के रिश्ते की हुई शुरुआत
  • मेरठ में मामा के यहां पले मशहूर फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज इरफान के लिए मसीहा साबित हुए
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इरफान खान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सफर दर सफर तमाशा दिखाने वाले मदारी का हाथ पकड़कर आखिर कौन चलता है। मगर ट्रेजडी किंग भारत भूषण के शहर ने जब 'बिल्लू बार्बर' का हाथ थामा तो अंतिम यात्रा तक पकड़ ढीली न होने दी। अभिनेता इरफान खान के जीवन में मेरठ हर दौर का साक्षी है।
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अभिनय के पर्दे पर दूरदर्शन से ऑस्कर की यात्रा का साथी मेरठ और यहां के कलाकार बने। इरफान और मेरठ के बीच चंद्रकांता सीरियल से रिश्ता बना। यह रिश्ता 'भारत एक खोज' से 'मकबूल', 'पान सिंह तोमर', 'मदारी', 'हैदर', 'बिल्लू बार्बर', 'लंच बॉक्स' और इससे आगे निकल चलता चला गया। उनके महाप्रयाण पर मेरठ से इरफान के रिश्तों की एक झलक:-

इरफान के इंडस्ट्री में दो दौर रहे। पहला दौर 2000 से पहले का था। जिसका आगाज दूरदर्शन से हुआ। इस दौर में असौड़ा गांव के निर्देश त्यागी उनके साथी बने। कॅरियर के इस प्रयोगात्मक दौर में इरफान ने मेरठ के नसरुद्दीन शाह के साथ भारत एक खोज में काम किया। मेरठ के दामाद पंकज कपूर की फिल्म ‘एक डॉक्टर की मौत’ में इरफान पत्रकार बने।
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उनके जीवन का दूसरा दौर 2000 के बाद बड़े पर्दे पर शुरू हुआ जो अच्छा नहीं रहा। ऐसे में बिजनौर में जन्मे, मेरठ में मामा के यहां पले मशहूर फिल्म निर्माता विशाल भारद्वाज इरफान के लिए मसीहा साबित हुए।

उन्होंने 'मकबूल' में इरफान को लीड रोल दिया। विशाल भारद्वाज और इरफान की जोड़ी ऐसी जमी कि दोनों ने एक के बाद एक कई फिल्में कीं। जीवन की अंतिम यात्रा में भी विशाल ही इरफान के साथ थे। उन्होंने नवाजुद्दी- शाह के साथ भी काम किया।

काश! चंद्रकांता की तरह आज फिर बदल देते स्क्रिप्ट : निर्देश
इरफान के साथ काम कर चुके हापुड़ के असौड़ा गांव निवासी निर्देश त्यागी ने बताया कि चंद्रकांता सीरियल में इरफान खान के लिए स्क्रिप्ट बदलनी पड़ी थी। हुआ यूं कि जब इरफान को सीरियल में 'अय्यार' की भूमिका दी गई तो वह उसमें वह मर जाते हैं। दर्शकों को इरफान का अभिनय इतना पसंद आया कि उन्होंने हमें पत्र भेजकर 'अय्यार' का किरदार वापस लाने की मांग की।

इरफान खान को सीरियल में वापस लाने के लिए स्क्रिप्ट में बदलाव किया गया। इरफान खान को दोबारा जिंदा करके धारावाहिक में वापसी कराई गई। यूनिट असिस्टेंट डायरेक्टर निर्देश कहते हैं चंद्रकांता के बाद ‘बनेगी अपनी बात’ और चाणक्य व फिल्मों में भी उनके साथ काम करने का मौका मिला। जो अनुभव चंद्रकांता के समय के हैं वह अनमोल है। जब हमें इरफान को बार-बार मारकर भी जिंदा करना पड़ा।

80 के डायलॉग तूने कैसे लिख लिए
कंकरखेड़ा निवासी मशहूर संवाद लेखक बंटी राठौर ने इरफान के निधन पर शोक जताया। उन्होंने बताया कि इरफान भाई से मेरी पहली मुलाकात फिल्म 'द एक्सपोज' के समय हुई थी। फिल्म के डायलॉग में ही लिख रहा था।

इसलिए हमारी अक्सर मुलाकात होती। जब उन्होंने फिल्म के डायलॉग देखे तो कहा अरे यह डायलॉग तुमने कैसे लिख लिए। बंटी ने बताया कि इरफान काफी शानदार व्यक्ति थे। बॉलीवुड के लिए उन्होंने जी जान से मेहनत की।

इरफान खान - फोटो : ट्विटर
पान सिंह तोमर में बना था सीएम
शहर के मशहूर अभिनेता गिरीश थापर ने बताया कि फिल्म पान सिंह तोमर में इरफान मुख्य किरदार में थे और इस फिल्म में मैं मुख्यमंत्री की भूमिका में था। फिल्म की शूटिंग उत्तराखंड में चल रही थी।

मेरे लिए यह पहली फिल्म थी। सेट पर एक दिन इरफान भाई से भेंट हुई। उन्होंने कहा और भाई मंत्री जी कैसे हैं? हालांकि बाद में मेरे वाले सीन को फिल्म से हटा दिया गया, मगर मुंबई में इरफान भाई से लगातार मेरी मुलाकात होती रही।

जब 'लंच बॉक्स' के लिए इरफान को किया कास्ट
सुपरटेक ग्रीन विलेज निवासी डॉ. रागिनी प्रताप के बेटे शुभम प्रताप मुंबई में कास्टिंग डायरेक्टर हैं। 'लंच बॉक्स' फिल्म की कास्टिंग शुभम ने ही की थी। वह कहते हैं इरफान जैसा साथी कलाकार होना मुश्किल है। 'लंच बॉक्स' फिल्म की सफलता देखकर मुझे लगा कि मेरा चुनाव ठीक था।

फिल्म में पहले मनोज बाजपेई व दूसरे अभिनेता को लेने पर विचार चल रहा था। फिर मैंने ही कहा कि हम इरफान खान को कास्ट कर सकते हैं, और वो फाइनल हो गए। इसके बाद सेट पर अक्सर उनसे मुलाकात होती थी। नए कलाकारों को वह हमेशा आगे बढ़ाने की बात करते थे। 
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उन्होंने कहा.. आइए फोटो क्लिक करें
मेरठ की मशहूर चिकित्सक दामोदर कॉलोनी निवासी डॉ. जानवी इन दिनों लॉकडाउन के कारण बंगलूरू में फंसी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इरफान खान से मेरी मुलाकात फ्लाइट में हुई थी। 2015 में बनारस जाते समय मैं उनसे मिली थी।

जानवी कहती हैं पहले यकीन नहीं हुआ कि इरफान हैं, फिर हिम्मत करके उनसे बात की। वो इतने सरल इंसान थे कि फ्लाइट से उतरने पर खुद कहा कि एक फोटो क्लिक कर लेते हैं। उन्होंने अपने स्टाफ से कहकर मेरे साथ फोटो कराया। तब शायद वो 'पीकू' की शूटिंग कर रहे थे। उनके जाने से मुझे काफी दुख हुआ है।

'डर' के सेट पर देवदूत से मुलाकात
हुमायूं नगर निवासी सईद 1995 में इरफान खान से मिले थे। उन्होंने बताया कि डर सीरियल के सेट पर हम मिले थे। मैंने हाथ मिलाते हुए उनसे कहा कि भाईजान मैं मेरठ से हूं। उन्होंने कहा कि जहां से नसरुद्दीन शाह और मंदाकिनी हैं।

उन्होंने यह सुनते ही मुझे गले लगा लिया। सईद कहते हैं सीरियल में भले इरफान ने सीरियल किलर का रोल किया था, लेकिन वो दिल से देवदूत थे। तब स्टार प्लस के डर सीरियल की शूटिंग चल रही थी, मेरे कजिन भाई जो कि इसमें सिनेमेटोग्राफी कर रहा था उसकी वजह से मुझे भी इरफान भाई से मिलने का मौका मिला। 
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