10 रुपये के स्टांप पर जमीन की खरीद फरोख्त की जांच शुरू
बहसूमा। रामराज में 10 रुपये के स्टांप पर जमीनों की हो रही खरीद फरोख्त के मामले में उपजिलाधिकारी मवाना ने बुधवार को न्यायिक तहसीलदार को जांच दी है। जिससे रामराज में 10 रुपये के स्टांप पर जमीन की खरीद फरोख्त करने वालों में हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले में सरकार को अब तक करोड़ों रुपये राजस्व का नुकसान हो चुका है। यहां के लोगों के पास कोई रजिस्ट्री नहीं है।
दो जिलों की सीमाओं में बसे 30 हजार आबादी वाले रामराज का सरकारी अभिलेखों में नाम दर्ज नहीं है। रामराज की स्थापना 1949 में रामराज हाउसिंग सोसाइटी से हुई थी। सोसाइटी के नाम पर 250 एकड़ भूमि मवाना व जानसठ तहसील में दर्ज है। तभी से यहां जमीनों की खरीद परोख्त 10 रुपये के स्टांप पर होती चली आ रही है। रामराज में किसी के पास भी रजिस्ट्री नहीं है। अमर उजाला ने 10 रुपये के स्टांप पर जमीन की हो रही खरीद फरोख्त से सरकार को करोड़ो रुपये राजस्व के नुकसान की खबर एक माह पूर्व प्रकाशित की थी। हाउसिंग सोसाइटी के नाम पर खरीदी गई जमीन व उन पर बनाए गए मकानों को लेकर लोगों की सांसें अटकी हुई हैं। बुधवार को उपजिलाधिकारी मवाना कमलेश गोयल ने बताया कि 10 रुपये के स्टांप पर रामराज में जमीन की खरीद व बिक्री की जांच न्यायिक तहसीलदार को सौंपी है। शीघ्र ही वह इसकी जांच रिपोर्ट सौंपेंगेे।
जानसठ तहसील के उपजिलाधिकारी अमृत कौर का कहना है कि समाना गांव में 10 रुपये के स्टांप पर हो रही जमीन की खरीद व बिक्री के मामले की वह गहनता से जांच पड़ताल करवाएंगी।