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वेस्ट यूपी में मिले हैं कई आतंकी कनेक्शन, अब तक पकड़े जा चुके हैं ये संदिग्ध

Thu, 27 Dec 2018 03:45 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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आतंकी
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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की घुसपैठ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में काफी अंदर तक हो चुकी है। करीब 17 साल में पश्चिम के अलग-अलग जिलों से आईएसआई के एजेंट और आतंकियों के साथियों समेत डेढ़ दर्जन से ज्यादा संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं। कई एजेंटों से पूछताछ में साफ हो चुका है कि मेरठ समेत कई जिलों में आईएसआई के लिए काम करने वाले स्लीपिंग मॉड्यूल की जड़ें काफी गहरी हो चुकी हैं। बुधवार को एनआईए और एटीएस ने आतंकी नेटवर्क को तोड़ने के लिए 16 जिलों में एक साथ ही छापेमारी सटीक इनपुट मिलने के बाद की। आतंकियों के नापाक मंसूबों को नाकामयाब करने में सुरक्षा एजेंसियों को सफलता भी हाथ लगी है।

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जांच एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार आईएसआई भारत में नए साल और 26 जनवरी के आसपास आतंकी वारदात को अंजाम दिलाने की फिराक में लगी है। इनपुट के अनुसार आईएसआई का निशाना दिल्ली, एनसीआर और वेस्ट यूपी का कोई जनपद हो सकता है। इसके अलावा इसकी भी चर्चा है कि देश को अस्थिर करने के लिए आईएसआई के निशाने पर प्रमुख नेता और संस्थान हैं। इस इनपुट पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) के साथ ही देश की तमाम खुफिया और जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं।

पांच संदिग्धों को ले जाने की चर्चा
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई का मेरठ के अलावा हापुड़, बुलंदशहर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर समेत कई जनपदों के स्लीपिंग मॉड्यूल और एजेंटों से पुराना कनेक्शन रहा है। आईएसआई के ऐसे मददगारों की धरपकड़ के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने मेरठ के देहात के इलाकों में छापामारी की। एनआईए और एटीएस ने खासतौर से मवाना, किठौर और परीक्षितगढ़ में कई जगहों पर दबिश दी। चर्चा है कि चार-पांच संदिग्ध लोगों को सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी पूछताछ के लिए उठाकर ले गए। हालांकि मेरठ के एक पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि यहां से कोई हिरासत में नहीं लिया गया। 

स्लीपिंग मॉड्यूल की क्या भूमिका
स्लीपिंग मॉड्यूल पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम करते हैं। आईएसआई के ट्रेंड एजेंटों, जासूसों से लेकर आतंकियों को एक तरह से सुरक्षा कवच और सुविधाएं उपलब्ध कराने के अलावा जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराना इन स्लीपिंग मॉड्यूल का काम होता है। इन स्लीपिंग मॉड्यूल के संपर्क काफी गहरे होते हैं। आईएसआई एजेंटों को स्थानीय स्तर पर सूचनाएं उपलब्ध कराने के लिए स्लीपिंग मॉड्यूल साथ रहते हैं। खासतौर से सैन्य इलाकों में इनकी पूरी मदद ली जाती है। कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें आईएसआई के जासूस महत्वपूर्ण सूचनाएं पाने के लिए सैन्य क्षेत्र में जा घुसे थे। हाल ही में मेरठ में तैनात रहा सेना का सिग्नल मैन कंचन सिंह भी आईएसआई को सूचनाएं साझा करने में पकड़ा गया था।
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कई संदिग्ध रडार पर 
सूत्रों की मानें तो एनआईए और एटीएस के रडार पर मेरठ के कई संदिग्ध हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे स्लीपिंग मॉड्यूल की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है, जिनमें नाम पूर्व में एजेंटों से पूछताछ में सामने आ चुके हैं। उनकी गतिविधियों और संपर्कों को देखा जा रहा है।

वेस्ट यूपी में आतंकी कनेक्शन
अब तक ये पकड़े गए

26 अक्तूबर 2018 : बुलंदशहर में जाहिद निवासी खुर्जा को गिरफ्तार किया गया
19 अक्तूबर 2018 : मेरठ कैंट से सेना का सिग्नल मैन कंचन सिंह पकड़ा गया
27 नवंबर 2015 : एसटीएफ ने मेरठ कैंट से आईएसआई एजेंट इजाज दबोचा
16 अगस्त 2014 : मेरठ से संदिग्ध आईएसआई एजेंट आसिफ अली गिरफ्तार
10 जनवरी 2009 : सहारनपुर से आईएसआई एजेंट आमिर अहमद उर्फ भूरा गिरफ्तार
12 दिसंबर 2008 : सीआरपीएफ कैंप में आतंकी हमले से जुड़े लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी फहीम अंसारी गिरफ्तार।
21 जून 2007 : बिजनौर में भारी मात्रा में आरडीएक्स के साथ हूजी के दो आतंकी गिरफ्तार
23 अगस्त 2005 : लश्कर-ए-तैयबा के चीफ कोऑर्डिनेटर अबू रज्जाक मसूद का मुजफ्फरनगर कनेक्शन मिला।
10 मार्च 2005: मेरठ से खलील हुसैन शाह नाम का आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
18 अप्रैल 2004: मेरठ से रूबी बेगम नाम की आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
14 मार्च, 2003: मुजफ्फरनगर से जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकी सज्जाद और इत्तफाकुल गिरफ्तार।
15 जुलाई 2002: मुजफ्फरनगर से एक आईएसआई एजेंट गिरफ्तार।
09 जुलाई 2002: मुरादाबाद से हिज्बुल मुजाहिदीन से ताल्लुक रखने वाले पांच आतंकी गिरफ्तार।
21 जून 2002 : पाक को भारतीय सेना के गोपनीय दस्तावेज मुहैया कराने वाले एक एजेंट को पकड़ा गया।
22 मार्च 2002:  हापुड़ से लश्कर-ए-तैयबा के चार आतंकी पकड़े गए
08 जनवरी, 2002:  गाजियाबाद में एक आईएसआई एजेंट को मुठभेड़ में मार गिराया गया।
1 मई 2001 : सहारनपुर से आईएसआई का एजेंट पकड़ा गया।
30 अप्रैल 2001 : पाकिस्तान से ट्रेंड आतंकी हापुड़ के एक मदरसे से पकड़ा गया।

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