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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस: बेटी के हौसले को सलाम, गृहस्थी का भी निभाया फर्ज, मेहनत से बन गईं जज

Sun, 08 Mar 2020 01:03 AM IST
कपिल kapil जगेंद्र उज्ज्वल, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
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पारुल चौधरी - फोटो : अमर उजाला
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जीवन के हर क्षेत्र में महिलाएं अपनी प्रतिभा और हौसले से कामयाबी की बेमिसाल उपलब्धियों का आसमां छू रही हैं। घर-गृहस्थी के फर्ज निभाने के साथ उच्च शिक्षा हासिल करने का जज्बा हो या मातृत्व की जिम्मेदारी। सिविल जज बनी मुजफ्फरनगर जिले की पारुल चौधरी की दास्तां इसलिए प्रेरक है, क्योंकि उन्होंने शादी के 16 साल बाद पीसीएस जे की परीक्षा उत्तीर्ण की। 

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बघरा ब्लाक में कम आबादी का एक गांव है खेड़ी दूधाधारी। 14 बीघा जमीन के किसान साधू सिंह और उनकी पत्नी विमलेश देवी ने बेटी पारुल को पढ़ाने की ठानी। जागाहेड़ी के कल्याणकारी कन्या इंटर कॉलेज से पारुल ने बारहवीं पास की। आर्थिक दिक्कतों के बावजूद पारुल ने पढ़ाई के जुनून को कम नहीं होने दिया। शिक्षा मित्र बन कर ग्रामीण बच्चों को पढ़ाया। माता-पिता ने गांव के परिवेश के अनुरूप जल्दी ही उनकी शादी वर्ष 2004 में कर दी। बघरा क्षेत्र के ही धोलरी गांव निवासी विनोद चिकारा से विवाह के उपरांत वे दिल्ली के खजूरी इलाके में किराये के मकान में रही। पति हार्डवेयर सप्लाई का बिजनेस करते हैं। पारुल ने उच्च शिक्षा पाने के लक्ष्य को सदैव याद रखा।

इसके बाद घरेलू जिम्मेदारी का दायित्व निभाने के साथ बीए और एमए की शिक्षा पूरी की। मेरठ कॉलेज मेरठ से एलएलबी और एलएलएम किया। बीएड भी की। निरंतर पढ़ाई ने उनके हौसले को बनाए रखा। पीसीएस जे की परीक्षा दी, मगर दो प्रयास में कामयाबी नहीं मिली। वर्ष 2019 में तीसरे प्रयास में पारुल पीसीएस जे की परीक्षा में सफल हुई। उनका जज बनने का सपना पूरा हो गया। उनकी सफलता का जिक्र इसलिए भी खास है, क्योंकि जब वह जज बनी तब उनका बड़ा बेटा नमन कक्षा 11 और छोटा पुत्र प्रांजल कक्षा सात में पढ़ रहे हैं।

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पारुल चौधरी कहती हैं कि पढ़ाई के हौसले और कुछ पाने के जुनून ने उन्हें यह मुकाम दिलाया है। पति के प्रोत्साहन से भी यह संभव हो पाया।

बरेली में बनी सिविल जज 
किसान की यह बेटी बरेली जिले में सिविल जज के पद पर नियुक्त हो गई है। तीन माह पहले 17 दिसंबर 2019 को उन्होंने ज्वॉइनिंग की। फिलहाल उनकी ट्रेनिंग चल रही है। 

पिता साधू सिंह कहते हैं कि बेटी ने बचपन में ही उच्च पद पाने का सपना देखा था। मां बिमलेश देवी बघरा सीएचसी पर एएनएम है, जबकि भाई शॉलेंद्र खेती बाड़ी संभालते है।

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