मेरठ जनपद में जानी क्षेत्र के महपा गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज विवेक चिकारा ने प्रदेश सरकार से नाराज होकर यहां से पलायन का मन बना लिया है। विवेक तीरंदाजी में पैरा ओलंपिक कोटा हासिल कर चुके हैं। वह वर्तमान में सोनीपत में नेशनल कैंप में अभ्यास कर रहे हैं।
प्रोत्साहन राशि बढ़ाने को लेकर प्रदेश सरकार से खिलाड़ियों की नाराजगी हमेशा बनी रहती है। वजह कई पड़ोसी राज्यों में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने पर सरकार खिलाड़ियों को अच्छी प्रोत्साहन राशि देती है। पैरा ओलंपिक में पावर लिफ्टिंग के खिलाड़ी सचिन चौधरी के बाद मेरठ के अंतरराष्ट्रीय तीरंदाज विवेक चिकारा ने उप्र छोड़ने की बात कही है। सोनीपत कैंप में मौजूद विवेक ने कहा कि हरियाणा, पंजाब में पैरा खिलाड़ियों को नेशनल पदक के लिए 3 लाख, वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेने पर 5 लाख और एशियन चैंपियनशिप में भाग लेने पर 3 लाख रुपये मिलते हैं। ऐसे में साल 2018 में उनका करीब 12 लाख रुपये का नुकसान हुआ। 2020 में टोकियो में होने वाले ओलंपिक में विवेक ने कोटा हासिल कर लिया है।
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गुरुकुल प्रभात आश्रम टिकरी से निकले तीरंदाज विवेक चिकारा का बायां पैर कृत्रिम है। सड़क हादसे के बाद डॉक्टरों को उनका पैर काटना पड़ा था। इसके बाद भी विवेक ने हिम्मत नहीं हारी। तीरंदाजी में गुरुकुल प्रभात आश्रम से शुरुआत के बाद सत्यकाम इंटरनेशनल में प्रशिक्षण लिया। पैरा नेशनल तीरंदाजी में 2018 में नेशनल रिकॉर्ड के साथ गोल्ड मेडल जीता। नीदरलैंड में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता। वर्ल्ड रैंकिंग में उनका 32वां स्थान है।
प्रदेश से दूर हो रहे खिलाड़ी
विवेक चिकारा ने बताया कि उप्र सरकार सामान्य खिलाड़ियों के लिए ही कुछ खास नहीं कर पाती। ऐसे में पैरा खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी में कोटा और प्रोत्साहन राशि तय करना बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में खिलाड़ियों के पास पलायन के अलावा कोई रास्ता नहीं है। सरकार को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए।
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