- अष्टान्हिका महापर्व पूर्णाहुति के साथ हुआ संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर में अष्टान्हिका महापर्व के अवसर पर मुनि भाव भूषण महाराज के सानिध्य में चल रहे अष्टान्हिका महापर्व महामंडल विधान का बुधवार को महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ विधिवत समापन हुआ। विधान के समापन अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठान में भाग लेकर विश्व शांति और मानव कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम का शुभारंभ जाप्य अनुष्ठान, अभिषेक और शांतिधारा से हुआ। शांतिधारा मृदुला जैन, शशांक जैन, सुषमा जैन, आशीष जैन, मनीष जैन, सत्येंद्र जैन और संजय जैन ने की। सभी पात्रों ने विधिविधान से धार्मिक क्रियाएं संपन्न कीं। महायज्ञ के दौरान धर्मप्रेमी पुरुषों और महिलाओं ने हवन की मांगलिक क्रियाओं में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने धूप अर्पित कर वातावरण को सुगंधित किया। भगवान श्री शांतिनाथ के समक्ष सभी श्रद्धालुओं ने विश्व शांति की कामना की। हवन के बाद पुण्याहवाचन की क्रिया संपन्न हुई। विधानाचार्य आशीष शास्त्री ने महायज्ञ की सभी मांगलिक क्रियाएं विधिविधान से संपन्न कराईं।
मुनि भाव भूषण महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रत्येक प्राणी में विद्यमान आत्मा का स्वभाव शांति, क्षमा, अहिंसा और दया है। यही मनुष्य का शाश्वत स्वभाव और धर्म है। जो मनुष्य शाश्वत धर्म को अपने जीवन में उतार लेता है, वही सच्चे अर्थों में जैन धर्म के मार्ग पर चलता है। धर्म को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर जीवन में उतारना होगा। तभी परिवार, समाज, राष्ट्र और विश्व का कल्याण संभव है। यही नंदीश्वरद्वीप महामंडल विधान का मूल उद्देश्य भी है। इस मौके पर क्षेत्र अध्यक्ष जीवेंद्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, मुख्य प्रबंधक मुकेश जैन, अतुल जैन, उमेश जैन, कमल जैन आदि का सहयोग रहा।
प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर में पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद