मेरठ। जमीयत उलमा मेरठ ने मुस्लिम युवाओं से अपील की है कि वे आई लव मोहम्मद जैसे नारों के बजाय हजूर रसूल-ए-पाक के बताए हुए रास्तों पर चलें। संगठन ने कहा कि हजूर की मोहब्बत का असली तरीका उनकी सीरत के मुताबिक जिंदगी गुजारना है, न कि शोर-शराबा करना।
संगठन ने अपील की है कि वे नमाज, रोज़ा, जकात और पड़ोसियों की देखभाल जैसी धार्मिक जिम्मेदारियों का पालन करें। संगठन के अध्यक्ष काजी जैनुर राशिदीन ने कहा कि महंगाई और बेरोजगारी जैसे असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नफरत का एजेंडा फैलाया जा रहा है। इसमें नौजवानों को फंसना नहीं चाहिए। साथ ही प्रशासन से उन्होंने मांग की है कि धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने वालों पर मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार सख्त कार्रवाई हो।