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इंसास चोरी होने का मामला: पीटीएस के बाद अब पीएसी वाहिनी में सेंधमारी, अधिकारियों ने साधी चुप्पी

Sun, 30 Jun 2019 05:14 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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नितिन तिवारी - एसएसपी मेरठ
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मेरठ में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में दस दिन पहले फर्जी प्रशिक्षु के ट्रेनिंग करने का मामला लखनऊ तक गूंजने पर पीटीएस की सुरक्षा में सवाल उठने लगे। यह मामला शांत भी नहीं हुआ कि पीटीएस के सामने पीएसी वाहिनी से इंसास चोरी की घटना से हड़कंप मच गया। यह पहला मामला है जब पीएसी वाहिनी से हथियार चोरी हुआ है, चार माह पहले लालकुर्ती थाने से सरकारी पिस्टल चोरी होने का मामला आया था।
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पीएसी वाहिनी में कमांड हाउस के पास से यदि इंसास जैसा हथियार चोरी हो जाए तो फिर पीएसी वाहिनी की कैसी सुरक्षा है। 44 वी वाहिनी पीएसी से सिपाही की इंसास चोरी होने की घटना को पुलिस और पीएसी के अधिकारी 24 घंटे तक दबाए रहे। जैसे ही मामला लखनऊ तक पहुंचा तो अफसरों की नींद उड़ गई। पुलिस अफसर जांच करने पहुंच गए।

शुक्रवार दोपहर को इंसास चोरी होने का मामला सामने आया। जिसके बाद पहले तो पीएसी के सिपाही अपने स्तर से इंसास को तलाशते रहे। लेकिन धीरे धीरे यह मामला पीएसी वाहिनी में फैल गया। जिसके बाद शाम को उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई।

उसके बाद पीएसी के अधिकारी मामले को दबाए रहे और पुलिस के उच्च अधिकारियों को मामले की जानकारी दी। शुक्रवार देर रात पीएसी के दो अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस के अधिकारियों से मदद मांगी। जिसके बाद क्राइम ब्रांच और एसटीएफ टीम को लगाया गया। हालांकि अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं कि पुलिस जांच कर रही है।

 जिसके बाद सिपाही प्रेमवीर कुमार से पूछताछ की गई। लेकिन कांस्टेबल भी अफसरों के सामने इंसास को लेकर ठीक से जवाब नहीं दे सका और सकपकाता रहा। लेकिन सवाल यह है कि पीएसी के जवानों को ड्यूटी करने और संवेदनशील क्षेत्रों में काफी अलर्ट माना जाता है। ऐसे में इंसास चोरी होने के बाद खुद पीएसी वाहिनी की सुरक्षा पर ही सवाल उठने लगे हैं।

इंस्पेक्टर को फटकार, राहगीर का नंबर
खरखौदा इंस्पेक्टर मनीष बिष्ट को उच्च अधिकारियों ने शनिवार को कड़ी फटकार लगाई। इंस्पेक्टर पहले बताते रहे कि मामला पीएसी का है, बाद में मुकदमा दर्ज होने पर लखनऊ से भी रिपोर्ट मांगी गई।

जिस मोबाइल नंबर से कॉल करके पीएसी के जवान से कहा कि जो इंसास चोरी हो गई है, वह हमारे पास है। 3.5 लाख रुपये का इंतजाम कर ले, नहीं तो मुकदमा झेलने को तैयार रहे। यह मोबाइल नंबर पुलिस एक राहगीर का बता रही है। जिसे पुलिस ने हिरासत में लिया है। राहगीर ने बताया कि मेरे फोन से एक युवक ने कॉल की थी कि मेरा बैलेंस खत्म हो गया है इमरजेंसी में कॉल करनी है।
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मुख्य गेट पर रहती है सुरक्षा
पीएसी वाहिनी में मुख्य गेट पर कड़ा पहरा रहता है। जहां प्रत्येक आने जाने वाले वाहन का नंबर दर्ज किया जाता है। यदि कोई भी बाहरी व्यक्ति जाता है तो उसका नाम, पता व मोबाइल नंबर भी रजिस्टर में दर्ज किया जाता है।

पीएसी में आवास भी बने हैं। इंसास राइफल की लंबाई 37.8 इंच और वजन बिना मैगजीन के 4.15 किग्रा होता है। ऐसे में इंसास को चोरी करने वाले ने पूरा दिमाग लगाया है। या तो चार पहिया वाहन में छिपाकर इंसास बाहर लाई गई है। ऐसे में सभी गाड़ियों के नंबरों की भी जांच शुरू कर दी गई है।

पीएसी में ही छिपा है भेदिया
पुलिस अफसरों का कहना है कि अनजान व्यक्ति पीएसी से इंसास जैसा हथियार चोरी नहीं कर सकता। जांच में सामने आया कि किसी नजदीकी सिपाही ने ही पूरी प्लानिंग के तहत इंसास को चोरी किया है। या फिर इंसास पीएसी वाहिनी में ही है। अधिकारी 17 सिपाहियों से पूछताछ कर चुके हैं। 
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