संवाद न्यूज एजेंसी
लावड़। कृषि विज्ञान केंद्र हस्तिनापुर के वैज्ञानिकों ने शुक्रवार को गाजर घास जागरूकता सप्ताह के तहत अंदावली, लावड़ में अभियान चलाकर किसानों को जागरूक किया।
केंद्र के पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्र ने गाजर घास खरपतवार के हानिकारक प्रभाव के बारे जानकारी दी। बताया कि यह एक विषैला, हानिकारक और आक्रामक खरपतवार है। यह जैव विविधता, मानव स्वास्थ्य और पशुधन के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती है। बताया कि इसके संपर्क में आने से त्वचा पर चकत्ते, डार्मेटाइटिस, इक्जिमा और सूजन जैसी एलर्जी हो सकती है। इसे पार्थेनियम डार्मेटाइटिस कहा जाता है। इसके परागकण और वास्पशील यौगिक वायुमंडल में फैलकर संवेदनशील व्यक्तियों में येलर्जिक रैनेटिस, अस्थमा और ब्रोंकाइटिस जैसे श्वसन विकार उत्पन्न कर सकते हैं। इसके अलावा गाजर घास अन्य कई प्रकार की समस्याएं पैदा करती है। जैसे रास्तों को अवरुद्ध करना, पार्कों, उद्यानों और वनों में संक्रमण फैलाना। उन्होंने गाजर घास को नियमित रूप से खत्म करने के लिए किसानों को प्रेरित किया। इस दौरान जगत सिंह, शिवकुमार, मथन सिंह, रामकुमार, अंशुल कुमार आदि मौजूद रहे।