- उद्यमियों ने जीएसटी अधिकारियों के समक्ष रखीं समस्याएं और सुझाव
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। आईआईए भवन मोहकमपुर फेस प्रथम में बृहस्पतिवार को जीएसटी के नियमों पर एक बैठक हुई। इसमें जीएसटी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने उद्यमियों ने अपनी समस्याएं रखीं। अपर आयुक्त ग्रेड-1 जीएसटी हरी राम चौरसिया और अपर आयुक्त ग्रेड-2 सुशील कुमार सिंह मुख्य अतिथि थे। विभागीय अधिकारियों ने उद्यमियों के सुझाव भी लिए। आईआईए की ओर से अंकित सिंघल ने धारा 61 के तहत जीएसटी रिटर्न जांच का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई मामलों में आवश्यकता से अधिक दस्तावेज मांगे जाते हैं। इससे सामान्य स्क्रूटनी विस्तृत जांच या ऑडिट जैसी स्थिति में बदल जाती है। स्क्रूटनी नोटिस में केवल वास्तविक अंतर के संबंध में ही जानकारी मांगी जानी चाहिए। उद्यमियों ने मांग की कि नोटिस जारी करने से पहले जीएसटी पोर्टल पर उपलब्ध सभी आंकड़ों की जांच हो। कई नोटिस में अधिक आईटीसी लेने या ब्लॉक आईटीसी का उल्लेख होता है। परंतु अंतर की गणना का आधार स्पष्ट नहीं किया जाता। इससे करदाताओं पर अनावश्यक अनुपालन का बोझ बढ़ता है।
आईटीसी और जांच संबंधी मुद्दे
आईआईए ने कहा कि आईटीसी को वास्तविक कारोबारी उपयोग और लेखांकन प्रक्रिया के आधार पर स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाए। केवल अनुमान या सामान्य आधार पर आईटीसी रोकने से बचना चाहिए। किसी सप्लायर के खिलाफ जांच होने पर जारी सामान्य अलर्ट के आधार पर खरीदारों का आईटीसी ब्लॉक नहीं किया जाना चाहिए। खरीदार के इनवॉइस और लेनदेन की स्वतंत्र जांच के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए। आईआईए वरिष्ठ पदाधिकारी अनुराग अग्रवाल ने कहा कि एक अथॉरिटी द्वारा कार्रवाई शुरू होने पर दूसरी अथॉरिटी उसी मामले में अलग से कार्रवाई न करे। भविष्य में मिलने वाले संबंधित अलर्ट और सूचनाएं भी उसी अथॉरिटी को भेजी जानी चाहिए।
रिटर्न संशोधन और ऑडिट संबंधी मांगें
आईआईए ने जीएसटीआर-9 में संशोधन की सुविधा देने की मांग भी रखी। उद्यमियों ने कहा कि वार्षिक रिटर्न लंबा और जटिल होने के कारण छोटी-मोटी गलतियां संभव हैं। ऐसे में रिटर्न दाखिल करने के बाद निर्धारित समय, जैसे तीन महीने के भीतर, एक बार संशोधन का अवसर मिलना चाहिए। इसके अलावा, जिन वित्तीय वर्षों का कर ऑडिट संयुक्त आयुक्त (कर ऑडिट) स्तर से पहले ही हो चुका है, उन्हीं वर्षों और उन्हीं मुद्दों पर दोबारा नोटिस जारी नहीं किए जाने की मांग की गई।
रिफंड और प्रमाणपत्र की समस्या
रिफंड मामलों में 40-50 वर्ष पुरानी फर्मों के प्रमाणपत्र मांगने की समस्या भी अधिकारियों के सामने रखी गई। आईआईए ने बताया कि जुलाई 2026 की जीआरसी बैठक में इस विषय पर चर्चा और समाधान को मंजूरी दी जा चुकी है। ऐसे मामलों में चार्टर्ड अकाउंटेंट का प्रमाणपत्र अनिवार्य नहीं होने की बात स्पष्ट की गई है। बैठक में आईआईए सचिव गौरव जैन, तनुज गुप्ता, अजय गुप्ता, संजीव मित्तल, सुमनेश अग्रवाल, मनु रस्तोगी, संजीव गर्ग, निपुण जैन समेत आईआईए के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे। विभाग की ओर से संयुक्त आयुक्त संजय सिंह, उपायुक्त अरुण कुमार पांडेय, उपायुक्त प्रतिभा निगम, उपायुक्त सीमा, मनीषा शुक्ला और अनिता सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।