घंटाघर के निकट नगर निगम परिसर में झाड़खंडी महादेव मंदिर में भक्तों की मनोकामना ही पूर्ण नहीं होती हैं, बल्कि यह 1857 क्रांति की धरोहर भी है। सिद्ध पीठ धर्मस्थल महादेव मंदिर की धार्मिक और क्रांति से जुड़ी गाथाएं हैं। इनको मंदिर की चारदीवारी संजोये हुए है। मंदिर में शिवरात्रि, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और नवरात्र सभी विशेष त्योहारों पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
मंदिर का इतिहास
मंदिर समिति के महामंत्री अनिल कुमार गुप्ता बताते हैं कि प्राचीन काल में यहां झाड़ियां हुआ करती थीं। 1857 की क्रांति के दौरान हिंदुस्तानी क्रांतिकारी अंग्रेजों के अत्याचार से बचने के लिए झाड़खंडी महादेव मंदिर को ही शरणस्थली बनाते थे। कहा जाता है कि क्रांतिकारी जिस वक्त को कंटीली झाड़ियों के बीच शिवलिंग के दर्शन हुए। तभी से सिद्धपीठ बाबा झाड़खंडी शिव मंदिर के नाम से प्रसिद्ध हो गया।
मां दुर्गा, हनुमान, शिवजी का है मंदिर
झाड़खंडी महादेव मंदिर परिसर में शिव मंदिर के साथ हनुमान मंदिर, मां दुर्गा मंदिर, विष्णु, माता लक्ष्मी, सरस्वती, श्रीराम दरबार, राधा-कृष्ण के अतिरिक्त बाबा भैरवनाथ के प्राचीन मंदिर हैं। मंदिर में जहां समिति द्वारा प्रत्येक वर्ष श्रीराम और श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन कराया जाता है। वहीं प्रतिदिन संकीर्तन भी होता है।