मेरठ। 50 करोड़ रुपये की लागत से बने नगर निगम के 100 एमएलडी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्लूटीपी) में चल रही गड़बड़ी घटने की बजाय बढ़ती जा रही हैं। महापौर और जीएम जलकल के निरीक्षण में 22 बिंदुओं पर गड़बड़ी मिली थीं। वहीं, नगर आयुक्त और अपर नगर आयुक्त के निरीक्षण में ये बढ़कर 28 हो गई हैं। इसके बाद तीन सदस्यों द्वारा तैयार रिपोर्ट नगर आयुक्त को भेज दी है।
जेएनएनयूआरएम के तहत करीब 400 करोड़ रुपये की मेरठ पेयजल योजना तैयार की गई। इसमें भोला की झाल पर करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया है। जिससे शहर को करीब 35 एमएलडी गंगाजल की आपूर्ति की जाती है। नगर निगम की इस परियोजना के संचालन और रखरखाव का जिम्मा जल निगम की नागर कार्य इकाई के पास है। जल निगम ने इसकी जिम्मेदारी आउटसोर्स फर्म टीएल इंफ्रा को दे रखी है। प्लांट संचालन और मेंटीनेंस के लिए नगर निगम हर महीने 27 लाख रुपये का भुगतान करता है। इतना पैसा मिलने के बाद भी न तो अभी तक पांच जलाशय चालू किए गए हैं। वहीं, प्लांट भी पूरी क्षमता पर नहीं चलाया गया है। अमर उजाला ने प्लांट में चल रहे घालमेल का मुद्दा प्रमुखता से उठाया तो महापौर से लेकर नगर आयुक्त तक ने प्लांट पर जाकर निरीक्षण किया था। महापौर के निरीक्षण के बाद रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने 22 बिंदुओं में खामियां दिखाईं। प्लांट की बदहाली, जल निगम तथा आउटसोर्स फर्म की लापरवाही के चलते 38 दिन बाद भी आपूर्ति शुरू नहीं की जा सकी है। बीते शनिवार को प्रभारी नगर आयुक्त श्रद्धा शांडिल्यायन ने प्लांट का निरीक्षण कर तीन सदस्यीय टीम से रिपोर्ट मांगी थी। सोमवार को निरीक्षण रिपोर्ट नगर आयुक्त मनीष बंसल के पास पहुंचा दी गई। इसमें 28 बिंदुओं पर खामी निकली हैं। इससे स्पष्ट है कि खामियां घटने की बजाय बढ़ गई हैं।
ये मिली मुख्य कमियां
- इंटेक चैंबर बिना सफाई किए पानी से भर दिया
- सेटलिंग बेसिन की सिल्ट सफाई के बाद दीवारों और फर्श पर पड़ी है सिल्ट
- रॉ वाटर पंपों की सफाई और मरम्मत शुरू नहीं की जा सकी
- रॉ वाटर के लेवल सेंसर, टर्बोडिटी मीटर, फ्लोमीटर पैनल से गायब मिले
- तीन क्लोरीफोकूलेटरों में से दो की सफाई नहीं हो सकी
- ओपन चैनल की सफाई नहीं की जा सकी है
- 10 फिल्टर बेड यूनिट में से एक फिल्टर बैड पार्ट-1ए ही साफ कर रिफलिंग की
- दो रिसाइकिल पंपों की मरम्मत लंबित है
- 1000 केवीए ट्रांसफार्मर की मरम्मत नहीं कराई गई
- प्रयोगशाला में हैवी मेटल टेस्टिंग उपकरण नहीं है
- 30 क्लोरीन टॉनर में से केवल 4 ही उपलब्ध मिले
वर्जन
खामियां जल्द दूर करने के लिए कहा
जल निगम अधिकारियों को तमाम खामियां दूर कर प्लांट को जल्द चलाने के लिए कहा गया है।-रतनलाल, महाप्रबंधक जलकल, नगर निगम मेरठ