साबिर जंधेड़ी का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
मुकीम काला के साथ अक्तूबर 2015 में जेल जाने के बाद गैंग लगभग निष्क्रिय हो चुका था, लेकिन 1 मई 2017 को बाराबंकी में पेशी पर जाते समय पुलिस कस्टडी से फरार होने के बाद मुकीम काला गैंग की कमान साबिर ने संभाल ली थी।
साबिर के ठिकाने पर खड़े होते थे लूट के वाहन
पुलिस के अनुसार मुकीम काला गैंग द्वारा लूटे गए वाहनों को मुकीम काला गैंग के अयूब जंग, फिरोज पव्वा के साथ साबिर के ठिकाने पर खड़ा किया जाता था। साबिर के गांव जंधेड़ी में भी कई बार लूटे गए वाहनों को रखा गया। जिन्हें बाद में लूट की घटनाओं में प्रयोग किया जाता था।
साबिर के रिश्तेदारों के यहां ठहराता था गैंग को
पुलिस के अनुसार साबिर अपने गैंग के सदस्यों को घटना करने के बाद अपने खेतों में एवं अपने रिश्तेदारों के यहां ठहराता था। गैंग ने दिल्ली के सीमापुरी में फ्लैट ले रखा था, देहरादून में किराए पर मकान ले रखा था, सहारनपुर के चिलकाना में रुकने का ठिकाना था। साबिर ने कई बार खेतों में पॉपुलर के पेड़ों पर पन्नी एवं तिरपाल बांधकर एवं ईख में पन्नी बांधकर गैंग के सदस्यों को ठहराया था। फतेहपुर में साबिर की फूफी के यहां भी गैंग कई दिन रुका। देवबंद में भी साबिर का रिश्तेदार है, वहां भी कई बार अपने गैंग के सदस्यों को रुकवाया गया।
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