फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीसीएसयू कैंपस में रैगिंग करने वालों की अब खैर नहीं, जानें कैसे हुई थी रेगिंग की शुरूआत

Wed, 08 Aug 2018 12:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
विज्ञापन
सीसीएसयू में एंटी रैगिंग कमेटी का हुआ गठन
विज्ञापन

मेरठ के सीसीएसयू कैंपस में रैगिंग करने वालों की अब खैर नहीं है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रैगिंग रोकने के लिए उच्च स्तरीय एंटी रैगिंग कमेटी 2018-19 गठन कर दिया है। समिति समय-समय पर आंतरिक एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग दस्तों के कार्यों की समीक्षा करेगी। अगर किसी छात्र के खिलाफ रैगिंग की शिकायत पाई गई तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। आगे जानिए कैसे कैंपस में रोकी जाएगी रैगिंग की समस्या :-

विज्ञापन


यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि कैंपस और हॉस्टलों में रैगिंग न हो इसको लेकर सभी जरूरी कदम उठाएं जाएंगे। कैंपस और कॉलेजों में एडमिशन होने के बाद कक्षाएं शुरू हो गई हैं। ऐसे में नए छात्र-छात्राएं जब स्कूल से कॉलेज में आते हैं तो उन्हें रैगिंग की सच्चाई का आभास नहीं होता। कई बार सीनियर्स रैगिंग के नाम पर छात्र-छात्राओं को प्रताड़ित करते हैं। कई बार बात मामूली मजाक से बेहद घृणित स्तर तक पहुंच जाती है।

रैगिंग के दुष्परिणामों को देखते हुए सख्त हुआ प्रशासन
सीसीएसयू प्रशासन के अनुसार रैगिंग का दंश झेल चुके कितने ही होनहार छात्र डिप्रेशन में चले जाते हैं। देश में कितने ही छात्र अपनी जान दे चुके हैं। रैगिंग रोकने को सुप्रीमकोर्ट द्वारा सख्त कानून बनाया जा चुका है। इसमें रैगिंग का आरोपी पाए जाने पर तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। सीसीएयू कैंपस में इसी को देखते हुए खास कमेटी का गठन किया गया है। कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बनी कमेटी में प्रति कुलपति प्रो. एचएस सिंह उपाध्यक्ष रहेंगे।

जिला प्रशासन से आईजी, एडीएम सिटी और एसपी सिटी को सदस्य बनाया गया है। एनजीओ की तरफ से अनीता राणा, ओमकार गुप्ता के अलावा कैंपस से छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. वाई विमला, चीफ प्रॉक्टर प्रो. भूपेंद्र सिंह, चीफ वार्डन प्रो. पीके शर्मा, रजिस्ट्रार ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव एवं समस्त संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्षों को सदस्य बनाया गया है। इसके साथ ही कमेटी में मीडियाकर्मियों और चार छात्र-छात्राओं को सदस्य बनाया गया है।
 
विज्ञापन

ऐसे हुई रैगिंग की शुरुआत

माना जाता है कि 7 से 8वीं शताब्दी में ग्रीस के खेल समुदायों में नए खिलाड़ियों में स्पोर्ट्स स्प्रिट जगाने के उद्देश्य से रैगिंग की शुरुआत हुई थी। इसमें जूनियर खिलाड़ियों को चिढ़ाया और अपमानित किया जाता था। समय के साथ रैगिंग में बदलाव होता गया और सेना ने भी इसे अपना हिस्सा बना लिया।

इसके बाद शिक्षण संस्थानों के छात्रों ने रैगिंग को अपना लिया। सीनियर और जूनियर के बीच दोस्ती बढ़ाने के लिए पहले हल्की-फुल्की रैगिंग की जाती थी। शालीनता का परिचय दिया जाता था लेकिन इसके बाद रैगिंग की आड़ में अश्लीलता और मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने वाले कार्य होेने लगे।

रैगिंग के मामले में श्रीलंका सबसे ज्यादा बदनाम
रैगिंग की वजह से दुनिया में पहली मौत 1873 में हुई। न्यूयॉर्क की कॉरनेल यूनिवर्सिटी की इमारत से गिरकर एक जूनियर छात्र की मौत हो गई। 90 के दशक में भारत में रैगिंग के घातक रूप ले लिया। 1997 में तमिलनाडु में सबसे ज्यादा रैगिंग के मामले आए। 2001 में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे भारत में रैगिंग पर प्रतिबंध लगा दिया। वर्तमान में रैगिंग के मामले में श्रीलंका दुनिया में सबसे ज्यादा बदनाम है।

ये भी रैगिंग में शामिल
-कॉलेज या हॉस्टल में किसी स्टूडेंट पर उसके रंगरूप या पहनावे के आधार पर टिप्पणी करना। उसे अजीबोगरीब नाम लेकर बुलाना।
-किसी स्टूडेंट को उसकी क्षेत्रीयता, भाषा या जाति के आधार पर अपमान जनक नाम लेकर पुकारना।
-स्टूडेंट की नस्ल या पारिवारिक अतीत या आर्थिक पृष्ठ भूमि को लेकर उसे लज्जित करना और अपमान करना रैगिंग माना जाएगा।
-छात्राओं को अजीबोगरीब नियमों के तहत परेशान करना या अपमान जनक टास्क देना। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें