जिले की सियासत में उनकी गिनती पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के नजदीकियों में होती रही है। लेकिन सपा की कमान पूर्व सीएम अखिलेश यादव के हाथ में पहुंच जाने के बाद साहब सिंह अपने वजूद की तलाश में जुटे थे। सपा के बजाए उन्हें इस बार भाजपा का विकल्प बेहतर लगा।
खेमा भाजपा का और खिलाड़ी रालोद के
सियासत के रंग भी अजीब हैं। जिले में भाजपा का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। सिर्फ दिग्गजों की बात करें तो भाजपा में शामिल हुए ज्यादातर खिलाड़ी रालोदिए रह चुके हैं। भाजपा के बागपत विधायक योगेश धामा, बड़ौत विधायक केपी मलिक और छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला रालोद में रह चुके हैं। पिछले दिनों रालोद जिलाध्यक्ष ठाकुर प्रदीप सिंह भी भाजपा में शामिल हो गए थे। अब पूर्व विधायक और रालोद के प्रवक्ता साहब सिंह भी भाजपाई हो गए हैं।
लोकसभा चुनाव के अभियान में जुटी भाजपा
भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारियां तेज कर दी है। यही वजह है कि विपक्षी दलों में सेंधमारी की जा रही है। पूर्व विधायक साहब सिंह के भी रालोद में आ जाने से अब भाजपा को मजबूती मिलेगी। इसकी वजह यह है कि उनकी प्रत्येक बिरादरी में अपनी पैठ है, जिसके दम पर वह अब तक आठ चुनाव लड़ चुके हैं और लखनऊ तक उनका लोहा माना जाता है।
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