केरल में महिला इमाम जमीदा द्वारा जुमा की नमाज की अगुवाई यानी इमामत करने को लेकर देवबंदी उलमा ने दो टूक कहा कि किसी भी मुस्लिम महिला का मस्जिद में इमामत करना जायज नहीं है। इस्लाम में इसके लिए सख्ती के साथ मना किया गया है।
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तिरुवनंतपुरम की रहने वाली जमीदा कुरआन और सुन्नत सोसायटी की महासचिव हैं। शुक्रवार को उन्होंने एक मस्जिद में इमामत करते हुए महिलाओं समेत करीब 80 से अधिक लोगों को जुमा की नमाज अदा कराई थी। जमीदा के इमामत करने को लेकर मदरसा दारुल उलूम निस्वाह के नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ कासमी का कहना है कि इस्लाम औरतों को इमामत करने की इजाजत नहीं देता। शरीयत में औरतों के लिए हुक्म है कि वो अपने घर में नमाज पढ़ें। जमीदा ने इमामत करके मुसलमानों और इस्लाम के साथ भद्दा मजाक करने की कोशिश की है। क्योंकि, इस्लाम में इसकी कतई इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग महिला इमाम के पीछे नमाज अदा कर रहे थे उनकी नमाज नहीं हुई। क्योंकि, जब इस्लाम में महिला को इमामत की इजाजत ही नहीं है तो उसके पीछे नमाज अदा कैसे हो सकती है। तंजीम उलमा-ए-हिंद के प्रदेशाध्यक्ष व अरबी के प्रसिद्ध विद्वान मौलाना नदीमुलवाजदी का कहना है कि इस्लाम में महिला की इमामत को सही नहीं कहा गया है ये सरासर नाजायज है। इमामत करने वाली महिला के इस अमल को किसी भी सूरत में जायज नहीं ठहराया जा सकता। क्योंकि, इस्लाम में महिलाओं के इमामत करने को सख्ती के साथ मना किया गया है। मौलाना यूसुफ का कहना है कि जिस चीज के लिए इस्लाम और शरीयत में मनाही है उसको ठीक समझकर करने से वह ठीक नहीं हो जाएगा।
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