मंजर देख पोता चिल्लाते हुए दौड़ा-दादाजी को बचा लो... कुत्ते दादा को खा रहे हैं...
संवाद न्यूज एजेंसी
जानीखुर्द। किठौली में मंगलवार की सुबह 8 बजे जब किसान लख्मी (58) हाथ में दरांती और ईख बांधने के लिए खेत के लिए निकले थे, तो उनके बेटे ने जितेंद्र ने पीछे से आवाज दी थी-पिताजी, जल्दी आना! आपका पोता इशांत कांवड़ लेकर दस बजे तक आ जाएगा। लख्मी ने मुस्कुराते हुए कहा था, बस एक बीघे ईख की बंधाई निपटाकर दोपहर तक आता हूं। कौन जानता था कि खेत के उस हरे-भरे कोने में लख्मी के कदम आखिरी बार पड़ रहे थे, और उनके वापस घर लौटने की राह कभी न आने वाली रह जाएगी।
जब इशांत की चीख से सिहर उठा पूरा गांव
मंगलवार दोपहर के दो बज चुके थे। लख्मी के बड़े बेटे जितेंद्र की नजरें बार-बार चौखट पर टिक रही थीं। धूप ढलने लगी थी, लेकिन पिता लख्मी का कोई पता नहीं था। कांवड़ लेकर आ चुके इशांत ने कहा, पापा, मैं दादाजी को बुला लाता हूं, धूप में थक गए होंगे। खाना भी ठंडा हो रहा है।
इशांत हंसते-खेलते खेत की मेड़ पर पहुंचा। उसने दूर से दादा को आवाज लगाई। कोई जवाब न मिलने पर पास जा कर देखा तो आवारा कुत्तों का झुंड दिखाई दिया। जैसे ही वह दो कदम और आगे बढ़ा, उसकी नजर जो पड़ी, उससे 14 साल के मासूम की रूह कांप गई। आवारा कुत्तों का झुंड उसके दादा के बेजान जिस्म पर टूट पड़ रहा था। मासूम इशांत की चीख निकल गईं। वह बदहवास होकर उल्टे पांव भागा, उसके पैर कांप रहे थे और जुबान से बस एक ही शब्द निकल रहा था- दादाजी को बचा लो... कुत्ते दादा को खा रहे हैं...
जब तक गांव वाले लाठी-डंडे लेकर पहुंचे, लख्मी की सांसें थम चुकी थीं। जिस मिट्टी पर लख्मी ने जिंदगी भर पसीना बहाकर अपने बच्चों का पेट पाला था, वही मिट्टी उनके खून से लाल हो चुकी थी।
जब लख्मी का बेजान और क्षत-विक्षत शरीर पुलिस ले जाने लगी तो मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। लख्मी के दोनों बेटे अंकुर और जितेंद्र क्षत-विक्षत शव से लिपटकर बेसुध हो गए। वह बार-बार लख्मी के चेहरे को छूने की कोशिश करतीं, जिसे कुत्तों ने पूरी तरह नोच डाला था।
मासूम इशांत की आंखों का खौफ
इशांत घटनास्थल पर एक कोने में बैठा शून्य में ताक रहा था। वह दृश्य उसकी मासूम आंखों में हमेशा-हमेशा के लिए छप गया है। वह किसी से बात नहीं कर रहा, बस रह-रहकर सिहर उठता है। गांव की व्यक्ति जब उसे चुप कराने जाती हैं, तो वह बस यही कहता है-दादाजी को मैं बचा नहीं पाया मासूम का यह अपराधबोध हर सुनने वाले की आंखों में आंसू ला देता है। लख्मी सिर्फ एक किसान नहीं थे, अपने परिवार की छत थे। एक हंसता-खेलता परिवार, जो सुबह तक खुशियों से भरा था, दोपहर होते-होते सिस्टम की लापरवाही और आवारा कुत्तों के आतंक के चलते ताश के पत्तों की तरह बिखर गया।
पहले भी हो चुकी घटनाएं
जानी क्षेत्र के किठौली, सिसौला गांव में आवारा कुत्तों का आतंक फैला हुआ है।
आवारा कुत्तों ने मंगलवार को किसान लख्मी को नोच नोच कर मार डाला।
-दस माह पूर्व भी शामली निवासी एक छह साल के बच्चे को नोचकर कुत्तों ने मार डाला था।
- एक माह पूर्व गांव किठौली की महिला विमला और भरतोई को भी कुत्तों ने काट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
- एक साल पूर्व गांव सिसौला में महिला सूरजमुखी को कुत्तों ने काट कर जान से मार दिया था।