जिला अस्पताल में दिल के दौरे के रोगी के आने पर सीधे मेरठ मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है। उस समय जबकि दिल के दौरे के रोगी को एक-एक मिनट का विलंब भारी पड़ सकता है, जिन्हें जोखिम उठाकर करीब 80 किमी का सफर करना पड़ता है।
जानकारी के अनुसार बिजनौर में दो निजी कॉर्डियोलॉजिस्ट हैं। हालिांक इनकी फीस अधिक नहीं है, लेकिन दिल के दौरे में लगने वाले इंजेक्शन व आईसीयू आदि का खर्चा आम लोगों के बूते से बाहर की बात है। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर गंभीर रूप से बीमार दिल के रोगियों को राम भरोसे ही रहना पड़ रहा है।
उधर, जिला अस्पताल में कोविड रोगियों के लिए एल-2 फैसिलिटी अस्पताल बनाया जा चुका है। सीएमएस डा. ज्ञानचंद का कहना है कि जिला अस्पताल में करीब-करीब सभी सुविधाएं हैं, लेकिन आईसीयू, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सहित सभी आपात व्यवस्थाएं होने के बावजूद यहां कॉर्डियोलॉजिस्ट का पद लंबे समय से खाली है।
कुछ अन्य स्पेशलिस्ट चिकित्सक भी नहीं है। रिक्त चल रहे पदों की शासन को नियमित रिपोर्ट जाती है। ऐसे में गंभीर हृदय रोगियों को रेफर करना मजबूरी है।
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