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समाज के विवाद में हस्तक्षेप करें जैन मुनि

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‘मंदिर का पैसा खाया तो बनेगा पाप का भागीदार’
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मेरठ। जो मंदिर का पैसा, मंदिर की संपत्ति खाता है वह कई जन्मों तक पाप का भागीदार बन जाता है। यह शब्द जैन मुनि प्रणम्य सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में कहे थे। उधर, दो गुटों में सक्रिय एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगा रहे संजय जैन और रंजीत जैन भी जैन मुनि के आदेशों को लेकर एकमत हैं। हालांकि जैन मुनि प्रणम्य सागर जी ने कहा कि अगर समाज के लोग उनसे सलाह मांगेंगे तो वह अवश्य उनका मार्ग दर्शन करेंगे।
सदर जैन समाज में मंदिर की चल और अचल संपत्ति को लेकर आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है। मुनि श्री के आदेश को लेकर संजय जैन और रंजीत जैन दोनों ही एकमत हैं। श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर समिति दुर्गाबाड़ी के प्रधान एवं ऋषभ एकेडमी के संचालक रंजीत जैन ने कहा कि ऋषभ एकेडमी की छह साल की बैलेंस शीट तैयार है। हालांकि इससे पूर्व का हिसाब दिया जाना चाहिए। स्कूल की संपत्ति किसी व्यक्ति विशेष की नहीं है। इसके लिए आम सभा बुलाई जाएगी। साथ ही विभिन्न मुद्दों को आर्थिक अपराध शाखा के सामने भी रखा जाएगा। अगर जैन मुनि प्रणम्य सागर जी महारजा कोई दिशा निर्देश करेंगे तो वह शिरोधार्य है। मुनि श्री के पास भी इस संबंध में बहुत सी जानकारी पहुंची हैं। रंजीत जैन ने कहा कि ऋषभ एकेडमी के प्रिंसिपल के पास भी विभिन्न प्रकार के मेसेज भेजे जा रहे हैं।
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उधर, सीए संजय जैन ने बताया कि साधु इस तरह के विवादों में नहीं पड़ते हैं, लेकिन मुनि श्री का आदेश सभी के लिए मान्य है। संजय जैन ने कहा कि इन समस्याओं का समाधान समाज की आम सभा में भी संभव हो सकता है, लेकिन बैठक की तारीख निश्चित नहीं की जा रही है। कई बार श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन पंचायती मंदिर का रजिस्ट्रेशन हुआ है। नियमित रुप से मंदिर में दान आ रहा है, लेकिन क्या उसका सही जगह प्रयोग हो रहा है इसकी जानकारी समाज को होनी चाहिए।
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