ग्रामीणों का आरोप पुलिस और आबकारी की मिलीभगत से धधक रहीं भट्ठियां
बिना मानक के तैयार हो रही अवैध शराब कई बार ले लेती है लोगों की जान
अमर उजाला पड़ताल
विपिन भाटी
परीक्षितगढ़ (मेरठ)। गंगा के कछार में सालों से कच्ची शराब बनाने की भट्ठियां चल रही हैं। पानी बढ़ने के बाद अब ये भट्ठियां गांव के पास के जंगलों में धधक रही हैं। शुक्रवार को अमर उजाला संवाददाता ने गंगा खादर से सटे गांवों में पड़ताल की तो जंगल में उठते धुएं के बीच कच्ची शराब बनती मिली। ग्रामीणों का आरोप है कि यह सब पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत से चल रहा है।
ऐसे बनती है कच्ची शराब
कच्ची शराब के धंधे से जुड़े लोग गन्ने का सीजन शुरू होते ही सस्ते में पुराना गुड़ खरीद लेते हैं। इस गुड़ को सड़ाया जाता है। इसमें यूरिया, नौसादर, लोहे की कील व कुछ केमिकल मिलाकर इसे पकाया जाता है। इसके बाद भाप को किसी बर्तन में एकत्र कर शराब तैयार की जाती है। इस शराब को बनाने का कोई मानक नहीं होता है। बिना जांच किए यह शराब लोगों को बेच दी जाती है। ऐसे में यह जहरीली भी हो सकती है। कई बार जानलेवा हो जाती है। कच्ची शराब की तीव्रता कम करने के लिए इसमें पानी मिलाया जाता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्ची शराब बनाने वाले अंदाज से पानी मिलाकर इसकी तीव्रता कम करते है। इसमें चूक होने पर शराब जानलेवा साबित होती है।
एक भट्टी का 6 हजार रुपये महीना
अवैैध शराब के धंधे से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि पुलिस और आबकारी विभाग ने भट्ठी रेट तय कर रखे हैं। एक भट्ठी के लिए दोनों विभागों में तीन तीन हजार रुपये दिए जाते हैं। कुछ स्थानों पर सिर्फ पुलिस की सरपरस्ती में धंधा चल रहा है। ऐसे में जब आबकारी टीम पुलिस के सहयोग से कार्रवाई करती है तो उसकी खबर पहले ही लीक हो जाती है।
बरसात में बंद रहता है काम
कच्ची शराब की भट्ठियां बरसात में नही चलती हैं। इसका बड़ा कारण गंगा में पानी बढ़ने के साथ ही खादर में भागने की जगह न मिलना है। मई और जून की तपती गर्मी में भी धंधा मंदा रहता है। सर्दियों में यह धंधा सबसे ज्यादा चलता है।
होली और चुनाव में महंगी
शराब बनाने वालों के मुताबिक, एक बोतल 50 से 70 रुपये में बिकती है। होली और चुनाव के मौके पर इसकी कीमत 100 रुपये तक हो जाती है। एक बोतल पर 15 से 20 रुपये का खर्च आता है। इस खर्च में पुलिस व आबकारी का पैसा भी शामिल है।
इन गांवों में चल रहा धंधा
खादर क्षेत्र के बीरनगर, कुंडा, मिर्जापुर, नदल्लीपुर, कोरावाला, जलालपुर गांवों के जंगल में भट्ठियां धधक रही हैं। यहां हजारों लीटर कच्ची शराब रोजाना तैयार होती है। इस बात की पुष्टि क्षेत्र के लोग भी करते हैं। पुलिस और आबकारी विभाग इन मौत के सौदागरों पर अंकुश लगाने में नाकाम हैं।