कैंची के लिए विख्यात मेरठ की पहचान अब उत्तर भारत में बासमती के उन्नत श्रेणी के बीज में भी तेजी से बनी है। तीन साल पहले करीब 16 लाख रुपये की बीज की मांग थी, जो अब तीन गुना बढ़कर करीब 50 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। यह बीज मोदीपुरम के बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान (बीईडीएफ) में विकसित हो रहा है।
सेंट्रल प्वाइंट बना बीईडीएफ
मोदीपुरम स्थित बासमती निर्यात विकास प्रतिष्ठान बासमती की विभिन्न गुणवत्तापरक प्रजातियों को विकसित करने का सेंट्रल प्वाइंट बन चुका है। जहां से बेहतर क्वालिटी का बीज लेने के लिए हरियाणा, पंजाब, जम्मू एंड कश्मीर, पंजाब, यूपी के किसान पहुंचते हैं। वर्ष 2013 में बीईडीएफ में विकसित बासमती के बीजों की बिक्री करीब 16 लाख रुपये की हुई थी। इसके बाद इन पर नए सिरे से शोध हुआ, तो वर्ष 2017 में इन बीजों की मांग तीन गुना तक बढ़ गई। दूसरे राज्यों के किसान न केवल यहां से बीज ले जाकर खेती कर रहे हैं, बल्कि अपने यहां पर भी बीज का उत्पादन कर आर्थिक लाभ कमा रहे हैं।
इन प्रजातियों के बीज की मांग
पूसा बासमती 1121, पूसा बासमती एक, पूसा बासमती 1509, पूसा बासमती 6, तरावड़ी बासमती, बासमती 10, बासमती सीएसआर30, वल्लभ बासमती 22, पंत बासमती 2, पंजाब बासमती आदि
फार्म पर तैयार किया 800 कुंतल बीज बीईडीएफ के प्रधान वैज्ञानिक व प्रभारी डॉ. रितेश शर्मा ने बताया कि इस बार बीईडीएफ के फार्म पर 800 कुंतल बीज तैयार किया गया था। बीज में खास बात यह है कि संतुलित जैविक रसायनों का प्रयोग किया गया है। जिस कारण से बीज की क्वालिटी पर विशेष ध्यान रखा गया है। गुणवत्ता युक्त बीज का उत्पादन कर ही किसानों को दिया जा रहा है।
यह अच्छे संकेत
बासमती के बीज के क्षेत्र में मेरठ की पहचान उत्तर भारत में बढ़ी है। बीईडीएफ बीज का हब बन चुका है। पांच साल में बीज की डिमांड तीन गुना बढ़ी है, जो कृषि क्षेत्र में अच्छा संकेत है। -डॉ. रितेश शर्मा, प्रधान वैज्ञानिक व प्रभारी बीईडीएफ
पांच वर्षों का रिपोर्ट कार्ड
वर्ष लाख
2013 16
2014 18
2015 23
2016 27
2017 50
(नोट: आंकडे़ बीईडीएफ से)