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फसल बेचकर कर्ज चुकाना था बच्चों को पढ़ाना था सब हो गया बर्बाद

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खादर क्षेत्र भरा बढ़ा का पानी स्रोत संवाद
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रविंद्र चौहान
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हस्तिनापुर। खादर क्षेत्र में बाढ़ से पहले हजारों लोगों ने सुनहरे सपने देखे थे। किसी को फसल बेचकर कर्ज चुकाना था तो किसी को अपने बच्चों को पढ़ाना था। परंतु बाढ़ ने सब कुछ बर्बाद कर दिया। अब उन आंखों में सुनहरे सपनों की जगह चिंता है। सुरक्षित आश्रय मिलने और रोजी-रोटी की।
गंगा ने सैकड़ों किसानों की फसल को कटान कर बर्बाद कर दिया है। दर्जनों गांव के किसानों की हजारों हेक्टेयर फसल बारिश और बाढ़ के पानी में गल कर नष्ट हो गई। इस समय क्षेत्र के कई गांवों का बाढ़ के कारण जनजीवन प्रभावित हो गया है। गंगा किनारे मौजूद गांव के लोगों की फसल और जमीन का बड़ा नुकसान हुआ है। जिस दिन से क्षेत्र में बाढ़ आई है, उसी दिन से प्रशासनिक अधिकारी और नेता लोगों के घरों तक पहुंच रहे हैं।
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बस्तोरा के ग्रामीण राजू चौहान और शिवकुमार का कहना है कि 50-50 हजार रुपये का कर्ज उठाकर फसल लगाई। उम्मीद थी कि फसल के तैयार होने पर पूरा कर्ज उतर जाएगा। प्रकृति की मार ने उनको बहुत बड़ा झटका दिया है। आपदा ने सब बर्बाद कर दिया। किसान प्रेम सिंह, राजपाल, अमनपाल ने बताया कि इस बार फसल अच्छी खड़ी थी। बच्चों ने दसवीं की पढ़ाई कर ली है और अब आगे की पढ़ाई के लिए किसी अच्छे स्कूल में एडमिशन कराना था, क्योंकि यहां पर आसपास कोई इंटर कॉलेज और अच्छा स्कूल नहीं है। बच्चों को पढ़ने के लिए शहर भेजना पड़ता है। परंतु पढ़ाई के सपने भी टूट गए। उनकी सारी जमीन गंगा में कट गई है। अब उनके पास न फसल बची न जमीन। अब आगे क्या होगा सब भगवान भरोसे है। (संवाद)
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बाढ़ आने पर तीन वर्ष पीछे चली जाती है जिंदगी

खादर क्षेत्र में बाढ़ आने का सिलसिला आज तक नहीं रुका। यहां पर अक्सर बाढ़ के हालात देखे जाते हैं। परंतु इस बाढ़ के बाद जो किसानों की बर्बादी का मंजर होता है वह काफी दर्द भरा होता है। क्योंकि वर्ष में एक बार आई बाढ़ किसानों को अगले तीन वर्षों तक पीछे धकेलकर छोड़ जाती है। बाढ़ से हुए नुकसान से उबरने के लिए तीन वर्ष का समय लगता है। इस कारण खादर क्षेत्र के किसान बाढ़ से विकसित नहीं हो पा रहे हैं। उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ रही है। कई किसान बर्बाद होकर पलायन कर चुके हैं।
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