मवाना। साहित्यिक एवं सामाजिक पत्रिका मौन मुखर के तत्वावधान में आयोजित रंगोत्सव के तहत आयोजित कवि सम्मेलन में डॉ. अर्जुन सिसौदिया ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि खुद के बल पर लड़ा सिया ने जीवन का संग्राम अकेला। धनुष तोड़कर लाए थे, अब वो संग में राम नहीं है। कौन भला स्वीकार करेगा जीवन एक संग्राम नहीं है।
उत्सव मंडप में आयोजित कवि सम्मेलन का शुभारंभ कार्यक्रम अध्यक्ष अखिल कौशिक, शिक्षाविद् एवं उद्योगपति डॉ. रामकुमार गुप्ता, उत्तम सिंह, अनुराग दुबलिश, डॉ. शक्ति साहनी, डॉ. अजयवीर गर्ग ने फीता काटकर तथा मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
कवि सम्मेलन का शुभारंभ गीतकार संजीव भ्रमर की सरस्वती से वंदना से हुआ। कवि सुनहरी लाल तुरंत ने काव्य पाठ में कहा घर में बेपैंदी के लोटा की तरह जीते हैं. बिल्लियां देख बिलौटा की तरह जीते हैं। कोई जसलीन सी सुंदर हसीन मिल जाए, तो बुढ़ापे में जलौटा की तरह जीते हैं। संजीव भ्रमर ने निगाहों की तराजू में बताओ तोल क्या लोगे। कवि राजेंद्र राजन ने कहा बादल हूं धरती की सारी प्यास लिए फिरता हूं, तुझसे मिलने की खातिर संन्यास लिए फिरता हूं।
सम्मेलन में कवि मोहित संगम, मोहित शौर्य, बलवीर खिचड़ी, यशपाल फक्कड़ ने भी काव्य पाठ किया। इस मौके पर बीके शर्मा, सीएचसी प्रभारी डॉ. सतीश भास्कर, विनय दुबलिश, मुनीषपाल, जयप्रकाश गुप्ता, श्यामलाल गुप्ता, विनोद खटीक, सुधीर चौधरी, वेदपाल, संजीव, विवेक भटनागर, श्रीराम मलिक, नीता दुबलिश, डॉ. नीता वर्मा, सर्वेश सिंह आदि उपस्थित थे।
कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करते मोहित संगम।- फोटो : MAWANA