मुफ्तियों का कहना है कि जब बीवी के पास कोई शरई गवाह नहीं है और शौहर भी उसके बयान की तस्दीक नहीं करता तो बीवी पर तलाक का हुक्म नहीं हो सकता। लेकिन जब बीवी ने अपने कानों से शौहर के जुमले (शब्द) मैंने तुझे आजाद कर दिया और मैंने तुझे छोड़ दिया सुन लिए तो उसमें किसी तरह का कोई शक बाकी नहीं रह जाता। जैसा की उक्त महिला ने पूछने पर बताया कि ऐसी सूरत में आजाद कर दिया का जुमला तलाक का जुमला है। जिससे कजाअन (लोगों के सामने जुमले आना) तलाक हो जाता है। अब महिला पर उसका शौहर हराम है। इसलिए वो उससे अलग हो जाए और उससे मुकम्मल तौर पर पर्दा रखे।
मुफ्तियों ने यह भी कहा कि अगर शौहर आईंदा भी अपने बयान पर कायम रहे तो तलाक या खुला (काजियों के द्वारा) के जरिये उससे छुटकारा हासिल करने की कोशिश करें। ताकि उसका निकाह शौहर से खत्म हो जाए और इद्दत के बाद किसी दूसरे मर्द से निकाह करके अपनी जिंदगी गुजारे।
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