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हंटर वाली ने रची फिल्मी कहानी, बन गई सीता और गीता की हेमामालिनी

Mon, 17 Jul 2017 01:48 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मेरठ
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हंटर वाली महिला
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एमपीजीएस में हंटर से पीटने की घटना के सात दिन बाद अब हंटर वाली महिला ने नई चाल चली है। पूर्व मंत्री याकूब कुरैशी की बेटी आसमां के वकील ने रविवार को मीडिया के सामने कहा कि हंटर वाली महिला याकूब की बेटी आसमां न होकर कोई उसकी हमशक्ल है। हैरत की बात है कि हंटर वाली को आठ दिन बाद पता चला कि ये वह खुद नहीं, बल्कि उसकी हमशक्ल है।
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याकूब की बेटी आसमां के अधिवक्ता हरिओम शर्मा ने प्रेसवार्ता करते हुए कहा कि स्कूल की घटना निंदनीय है। लेकिन हंटर वाली आसमां नहीं, बल्कि उसकी कोई हमशक्ल है। वैसे भी आसमां को याकूब की बेटी के नाम से अब नहीं जानना चाहिए, बल्कि आसमां शादाब की पत्नी है। सात दिन बाद सामने आने के सवाल पर कहा कि यह पहले इस बारे में नहीं सोचा था, यहां देरी हो गई। हंटर वाली महिला याकूब की बेटी नहीं है इस पर कोर्ट में धर्मग्रंथ पर हाथ रखकर कसम खाने के सवाल पर अधिवक्ता ने इंकार कर दिया।
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याकूब के आगे पुलिस बेबस

हंटर वाली महिला कैमरे में कैद
बकौल वकील याकूब ने भी पूरे प्रकरण की निंदा की है। आसमां के वकील ने कहा, जिन छात्रों ने स्कूल में ताला जड़ा उनकी भी गिरफ्तारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुलिस ने डीजीपी के सर्कुलर अक्टूबर 2011 का पालन नहीं किया। जिसमें सात वर्ष या उससे कम की सजा में पुलिस गिरफ्तार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गये आरोपी को जमानत पर छोड़ दिया जाए। पूरे प्रकरण में आईपीसी की 452 धारा गृह अत्याचार में लगती है। स्कूल में हमले में यह धारा नहीं लगनी चाहिए थी। क्योंकि स्कूल एक पब्लिक पैलेस है। पुलिस ने प्रदेश सरकार के दबाव में राजनीति रूप से उत्पीड़न कर रही है। 

अधिवक्ता संदीप पहल ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रेसवार्ता पुलिस और प्रशासन पर दबाव बनाने की नीयत से की गई है। एमपीजीएस में हंटर लेकर दहशत फैलाने वाली आसमां को जेल जाने से बचाने का प्रयास है। स्कूल में महिलाओं व युवकों द्वारा गुंडई लोक व्यवस्था ध्वस्त करने के कारण प्रशासन पुलिस के पास एनएसए की कार्रवाई करने का विकल्प है। जानबूझकर पुलिस ने साधारण जमानती धारा लगाई हैं। एनएसए की कार्रवाई न किये जाने की दशा में स्पष्ट हो जाएगा कि प्रदेश में कोई नई सरकार नहीं है और जनता का सड़क पर आना मजबूरी होगा।

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