क्रांति दिवस के अवसर पर सूरजकुंड पार्क में हंगामे के बीच 41 मीटर ऊंचा तिरंगा लहराया गया। समय पर कार्यक्रम न करने पर भाजपा नेताओं ने विरोध किया। साथ ही अधिकारियों की तानाशाही करार दिया। सवाल उठाया कि किस प्रोटोकॉल के तहत डीएम झंडा फहरा रहे हैं।
सूरजकुंड पार्क में ध्वजारोहण के लिए शाम सात बजे का समय निर्धारित किया था। कमिश्नर आलोक सिन्हा को झंडा फहराना था। सांसद राजेंद्र अग्रवाल, महापौर सहित शहर के काफी गणमान्य लोग पौने सात बजे से पहले ही सूरजकुंड पार्क पहुंच गए।
सभी लोग कमिश्नर और डीएम का इंतजार करते रहे। शाम 7:45 बजे तक कमिश्नर नहीं आए। डीएम पंकज यादव और एडीएमई दिनेश चंद्र पहुंच गए। लगभग 7:55 बजे डीएम ने इलेक्ट्रॉनिक मशीन से तिरंगा फहराया। सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि निर्धारित समय पर ध्वजारोहण न होना राष्ट्रध्वज का अपमान है।
यह भी समझ से परे है कि किस प्रोटोकॉल के तहत प्रशासनिक अधिकारी राष्ट्रध्वज फहरा रहे हैं। जनप्रतिनिधियों को सूचना तक नहीं दी गई। महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने कहा कि जिला प्रशासन ने राष्ट्रध्वज और जनप्रतिनिधियों का अपमान किया है।
जनप्रतिनिधि और शहर की जनता पौने सात बजे से ही तिरंगे के सामने खड़े रहे। लेकिन अधिकारी पौने आठ बजे पहुंचे। यह सरकार और अधिकारियों का तानाशाही रवैया है। राष्ट्रध्वज फहराने के लिए न तो किसी फ्रीडम फाइटर को बुलाया और न ही किसी शहीद की पत्नी या उसके परिवार के सदस्य को बुलाया गया।
क्रांति दिवस पर जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने शहीदों का अपमान किया है। इस अवसर पर सपा नेता भूषण त्यागी, मनोज सिवाच, अजय गुप्ता, हरीश कुमार, राजकुमार मुन्ना, सेंसरपाल, पंकज कतीरा, राकेश शर्मा, डॉ. राजेश कुमार, राम मेहर सिंह मौजूद रहे।
अव्यवस्थाओं का रहा बोलबाला
सूरजकुंड पार्क में ध्वजारोहण के समय अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। पार्क में लगभग एक हजार लोग एकत्र थे। एक घंटे तक डीएम के इंतजार में बैठे बच्चे पानी को भी तरस गए। कार्यक्रम में पूरी तरह अव्यवस्था फैली रही। गुस्साए लोगों ने जमकर हंगामा काटा। वहीं तिरंगे पर एमडीए ने 21 लाख रुपये खर्च किए हैं।