टपकती छतों को पॉलिथीन से ढक कर ही परिवार अपने आप को सुरक्षित मान लेते हैं। लेकिन बरसात के मौसम में ये मकान जान बचाने वाले नहीं जान लेने वाले साबित हो सकते हैं। घर के अंदर रहने वालों के ही नहीं पास से गुजरने वालों के लिए भी ये खतरे का सबब बन सकते हैं।
खस्ताहाल मकान लेते रहे हैं जान
जिले में भी मकान गिरने से जान जाना नई बात नहीं है। साल 2012 में तो एक स्कूल की छत गिरने से छह मासूमों की मौत हो गई थी व कई घायल हो गए थे। जिले भर में बरसात के मौसम में अब भी मकान गिरने के मामले सामने आते रहते हैं। जिला मुख्यालय पर मुख्य बाजार में दो कई दशक पुराने भवन हैं। यहां पर मार्केट बना हुआ है।
बिजनौर में लखोरी ईंट के बने गली मुहल्लों में भी कई मकान हैं। कई साल से नगरवासी इन भवनों के ध्वस्तीकरण की मांग कर रहे हैं। नगर पालिका इन भवनों की जांच के लिए पत्र पीडब्लूडी को भेज देती है। पीडब्लूडी ने जांच की या नहीं किसी को नहीं पता। लेकिन भवन आज भी वैसे ही खड़े हैं।
डीएम के यहां से जो शिकायत भेजी जाती हैं, उन पर जांच करा अपनी आख्या भेज देते हैं। - पीडब्लूडी के एक्सईएन सुनील सागर