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बिना संघर्ष के व्यर्थ है मानव जीवन

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प्राचीन दिगंबर जैन बड़े मंदिर पर पूजा अर्चना करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
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हस्तिनापुर। श्री दिगंबर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर के त्रिमूर्ति जिनालय में चल रहे 40 दिवसीय श्री शांतिनाथ विधान में भाव भूषण महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति एक धर्म प्रधान संस्कृति है और हस्तिनापुर उन्हीं में से एक प्राचीन स्थान है। धरा पर अनेक ऋषि, मुनियों ने तपस्या कर समस्त देश को पवित्र कर दिया है। बिना संघर्ष के मनुष्य का जीवन व्यर्थ है।
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शांतिनाथ विधान पाठ में शनिवार को श्री जिनेंद्र भगवान का मंत्रोचार पूर्वक जलाभिषेक किया गया। जिसमें शांतिधारा करने का सौभाग्य यश जैन को प्राप्त हुआ। मुनि श्री भारत भूषण महाराज ने कहा कि जीवन एक संघर्ष है और सफलता इसकी शोभा है उपलब्धि इसका वरदान है। असफलता की चिंता न करो, वह बिल्कुल स्वभाविक है जीवन में यदि संघर्ष न रहे तो जीवित रहना ही व्यर्थ है। इस दौरान राजीव जैन निशा जैन, सागर जैन नेहा जैन, साहिल जैन, आयुषी जैन, अदविक जैन, नितारा जैन, अथर्व जैन, आदि परिवारों की ओर से विधान कराया गया। विधान संयोजक विजय कुमार जैन ने स्वागत किया। पं. आशीष जैन ने विधि विधान से सभी मांगलिक क्रियाएं संपन्न कराई। संध्याकालीन बेला में संगीतमय महाआरती की गई। जिसमें पंचपरमेष्ठी भगवान, शांतिनाथ, पार्श्वनाथ भगवान एवं महावीर स्वामी की आरती कर श्रद्धालुओं ने पुण्य का संचय किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के पुरस्कार यश जैन द्वारा वितरित किए गए। जिसमें श्रद्धालुओं ने भक्ति के साथ मंडल पर 120 अर्घ्य चढ़ाए। जिनेंद्र भक्ति व भजन संध्या हुई। जिसमें दर्शनार्थियोें ने जिनेंद्र भगवान के सम्मुख चंवर ढुराकर भक्ति नृत्य किया। इस दौरान अध्यक्ष जिवेंद्र कुमार जैन महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र कुमार जैन, राजीव जैन, जितेंद्र कुमार जैन आदि का सहयोग रहा। संवाद
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