कैटल कॉलोनी बसाए बगैर कैसे बाहर होंगी डेयरियां
मेरठ। कैटल कॉलोनी बसाए बगैर शहर से डेयरियों को बाहर करने की नगर निगम की कवायद बेमानी नजर आ रही है। हाईकोर्ट में विचाराधीन अवमानना याचिका के चलते ही नगर निगम इस मामले में गंभीरता दिखाने की कोशिश में जुटा है। उधर, डेयरी संचालकों की लड़ाई लड़ रहे लोकेश खुराना ने कोर्ट खुलते ही मकबरा डिग्गी की कार्रवाई रिपोर्ट के साथ तुरंत याचिका दाखिल करने की बात कही है।
हाईकोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन को बिना कैटल कॉलोनी बसाए शहर से बाहर नहीं करने को कहा था। नगर निगम की मांग पर एमडीए ने अलीपुर जिजमाना में 1500 पशुओं के लिए 130 भूखंड और गांव काशी में 3000 पशुओं के लिए 275 भूखंड की जमीन उपलब्ध होना बताया था। दोनों जमीनों पर 4500 पशुओं को ही रखा जा सकता है। लेकिन नगर निगम प्रशासन द्वारा 8000 पशुओं के लिए जमीन का इंतजाम करने को कहा गया था। इसके चलते एमडीए ने 3500 पशुओं के लिए जमीन उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन से मांग की थी। तब से ही यह मामला लटका पड़ा है। कोरोना के चलते कोर्ट बंद होने से अवमानना मामले की भी सुनवाई नहीं हो पा रही है। रविवार को चली कार्रवाई के दौरान डेयरी संचालकों ने कैटल कॉलोनी बसाकर देने की भी मांग की। संचालकों का कहना था कि वह अपने पशु लेकर कहां जाएंगे।
वर्जन...
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के साथ ही एनजीटी का स्पष्ट आदेश है कि जो भी उद्योग शहर में गंदगी फैला रहे हैं और पानी प्रदूषित कर रहे हैं, उन सभी को बलपूर्वक बाहर कर दो। डेयरियों की वजह से शहर नरक बना हुआ है। निगम के संसाधन इनके द्वारा नालों में बहाया जा रहा गोबर निकालने में ही लगे हैं। डेयरियों को कोई रियायत नहीं दी जाएगी। इन्हें हर हाल में बाहर जाना होगा। -डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया, नगर आयुक्त