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Meerut News: बैटरी और पहिए ही नहीं तो कैसे सड़कों पर दौड़ेंगी इलेक्ट्रिक बस

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मेरठ। सिटी ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिक बस सेवा बे-पटरी होती जा रही है। प्रतिदिन 12-15 बसें बैटरी, पहिया न होने या फिर किसी अन्य तकनीकी खराबी के कारण डिपो में खड़ी हो रही हैं। इनमें से तीन बसों में पहिए नहीं हैं। आठ बसें बैटरी न होने के कारण खड़ी हैं। इनके अलावा प्रतिदिन पांच से छह बस मेंटीनेंस के लिए खड़ी रहती हैं। बसों की कमी से यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। बताया गया है कि बसों की बैटरी चीन से नहीं आ पा रही हैं।
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सरकार ने महानगर में इलेक्ट्रिक सिटी बस सेवा की सुविधा दी है। इस बेड़े में 51 बसें हैं। इनका संचालन हापुड़ रोड स्थित लोहियानगर बस डिपो से होता है। इन बसों का संचालन मेरठ शहर में ही नहीं बल्कि हस्तिनापुर, सरधना, मोदीनगर तक किया जाता है। ये बसें यात्रियों के लिए बेहद सुविधजनक हैं। बैटरी से चलने वाली इन बसों में एसी की सुविधा है। लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होने से यात्रियों को कई बार लंबा इंतजार करना पड़ता है।
हापुड़ रोड स्थित सिटी ट्रांसपोर्ट बस डिपो पर अक्सर अधिकतर बसें को चार्जिंग स्टेशन पर खड़ी रहती हैं। यहीं एक तरफ कुछ बसें बगैर पहिया और बैटरी के खड़ी हुईं हैं। तीन बस जिनके पहिए खराब हैं। इन्हें देखकर लगता है कि कई माह से बसों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जानकारी दी गई कि सरकार ने इलेक्ट्रिक बसों के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी ग्रीन सेल कंपनी को दी हुई है। बसों में बैटरी हो या फिर अन्य रखरखाव। इसकी जिम्मेदारी कंपनी की ही है।
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बैटरी-पहिए मिलते ही दौड़ने लगेंगी बसें
बसों में बैटरी की दिक्कत है। बैटरी चीन से आती हैं। इसलिए कुछ समय लग जाता है। वैसे तो बसों के मेंटीनेंस की जिम्मेदारी ग्रीन सेल कंपनी की है। कंपनी के साथ पत्राचार किया हुआ है। कुछ बसों का रखरखाव हम डिपो की गैराज में भी कराते हैं। बैटरी और पहिए जैसे ही कंपनी से मिल जाएंगे सभी बसें सड़कों पर दौड़ने लगेंगी।
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- दुष्यंत कुमार, एआरएम लोहियानगर
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