मेरठ। आवास एवं विकास परिषद मेरठ में तैनात प्रशासनिक अधिकारी मनोहर लाल को अपर आवास आयुक्त एवं सचिव निधि गुप्ता वत्स ने शनिवार को सस्पेंड कर दिया। साथ ही विभागीय जांच समिति भी गठित की गई है। मनोहर लाल पर एक आवंटित संपत्ति को ट्रांसफर करने के नाम पर प्रॉपर्टी डीलर मुकेश गोयल से 25 लाख रुपये मांगने का आरोप लगा था। इसकी ऑडियो भी वायरल हो गई थी।
संयुक्त आवास आयुक्त अजय श्रीवास्तव ने बताया कि यह मामला परिषद की योजना संख्या-छह के जागृति विहार सेक्टर 3 स्थित अल्प आय वर्ग के आवास संख्या 532/3 का है। यह आवास वर्ष 1990 में नेपाल सिंह पुत्र हरवंश सिंह को आवंटित किया गया था। लेकिन कुछ साल किश्तें जमा करने के बाद मूल आवंटी गायब हो गया था। जिसके बाद इस आवास का कोई असली वारिस सामने नही आया। इस बीच प्रॉपर्टी डीलर मुकेश गोयल निवासी सरधना ने यह आवास अपने नाम कराने को लेकर पॉवर ऑफ अटार्नी के साथ नामांतरण का आवेदन किया। परिषद के अधिकारियों ने यह मामला पकड़ लिया। आरोप है कि आवास का नामांतरण कराने के नाम पर आवास एवं विकास के संपत्ति प्रबंध कार्यालय के प्रशासनिक अधिकारी मनोहर लाल ने मुकेश गोयल से फोन पर बातचीत के दौरान एक अधिकारी के नाम पर 25 लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। मुकेश गोयल ने यह बात रिकॉर्ड कर यह ऑडियो वायरल कर दी थी।
एक माह में देनी होगी जांच आख्या
अपर आवास आयुक्त एवं सचिव निधि गुप्ता वत्स द्वारा जारी आदेश में प्रशासनिक अधिकारी मनोहर लाल को सस्पेंड करते हुए जांच संयुक्त आवास आयुक्त मेरठ अजय श्रीवास्तव को सौंपते हुए एक माह में आख्या मांगी गई है। मनोहर लाल को संयुक्त आवास आयुक्त कार्यालय से अटैच किया गया है। संयुक्त आवास आयुक्त अजय श्रीवास्तव ने बताया कि आदेश मिल गए हैं। नियत समय में जांच आख्या सौंप दी जाएगी।
नौचंदी थाने पर दी तहरीर
आरोपी मनोहर लाल के निलंबन के बाद नौचंदी थाने में तहरीर दी गई। परिषद द्वारा इस प्रकरण में ऑडियो वायरल होने का हवाला दिया गया। इंस्पेक्टर नौचंदी नीरज कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में आवास एवं विकास परिषद से तहरीर मिली है। उच्च अधिकारियों के निर्देश मिलने पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
मैं अपनी बात पर कायम हूं
मैंने पहले भी कहा था कि वह आदमी मुझ पर गलत तरीके से काम कराने के लिए दबाव बना रहा था। रोजाना मेरे घर आकर बैठ जाता था इसलिए मैंने उसे टालने के लिए बोल दिया कि पैसे लगेंगे। मैं अभी भी इस बात पर कायम हूं। बाकी मुझे कुछ नहीं कहना। - मनोहर लाल, प्रशासनिक अधिकारी (निलंबित)